सपा ने यूपी के 100 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में हजारों डुप्लीकेट नाम मिलने का दावा किया है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने लखनऊ में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में यह शिकायत की गई है कि प्रदेश की 100 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की गई पड़ताल में हजारों की संख्या में डुप्लीकेट और फर्जी मतदाता पकड़े गए हैं। आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से संपन्न कराने के लिए इस गड़बड़ी के तत्काल सत्यापन और सुधार की मांग उठाई गई है।
166 दिन की SIR प्रक्रिया पर खड़े किए गंभीर सवाल
समाजवादी पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और उसकी साख पर तीखे सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू करने से पहले यह आश्वासन दिया था कि मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और दुरुस्त करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।
तय कार्यक्रम के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 से शुरू हुई 166 दिनों की इस लंबी प्रक्रिया के बावजूद आज भी प्रदेश की लगभग हर विधानसभा के प्रत्येक पोलिंग बूथ पर बड़ी संख्या में डुप्लीकेट मतदाता दर्ज हैं। सपा का तर्क है कि इस तरह की प्रशासनिक चूक से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कन्नौज के छिबरामऊ में एक ही मतदाता के नाम कई बार दर्ज
पार्टी द्वारा जारी जांच रिपोर्ट में बूथवार आंकड़ों के साथ धांधली का खुलासा किया गया है। जनपद कन्नौज की 196-छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 49 पर मतदाता 'नीतू' (पति: आनंद कुमार, मकान संख्या: 126, आयु: 41 वर्ष) का नाम मतदाता क्रम संख्या 546, 547 और 548 पर दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि तीनों ही प्रविष्टियों में उनके EPIC (वोटर आईडी) नंबर अलग-अलग हैं।
इसी तरह पोलिंग स्टेशन संख्या 531, 532 और 541 पर मतदाता 'मीरा गुप्ता' (पति: मुन्ना लाल, मकान संख्या: 133, आयु: 30 वर्ष) का नाम क्रमशः क्रम संख्या 481, 560 और 486 पर तीन बार दर्ज पाया गया है। इसके अलावा, पोलिंग स्टेशन 85 पर 'प्रखर बैस' (पिता: अजीत प्रताप सिंह, आयु: 19 वर्ष) का नाम तीन जगह और पोलिंग स्टेशन 96 पर 'मुनेश' (पिता: राजेंद्र, आयु: 23 वर्ष) का नाम दो बार अलग-अलग EPIC नंबरों के साथ दर्ज मिला है।
इटावा के जसवंतनगर में युवा मतदाताओं की डुप्लीकेट प्रविष्टियां
सपा के गढ़ माने जाने वाले जनपद इटावा की 199-जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में भी इसी तरह की गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। यहां बूथ संख्या 9 व 10 पर मतदाता 'दीपिका पाल' (पिता: ब्रजेश कुमार, मकान संख्या: 347/2, आयु: 18 वर्ष) का नाम क्रमशः क्रम संख्या 949, 944 और 945 पर तीन बार दर्ज पाया गया है।
इसी क्रम में पोलिंग स्टेशन संख्या 166 पर 'हिमेश बाबू' (पिता: रनवीर सिंह, आयु: 18 वर्ष) का नाम तीन बार (क्रम संख्या 871, 872, 873) दर्ज मिला। वहीं, पोलिंग स्टेशन 240 पर 'शिवानी' (पति: विवेक यादव) और पोलिंग स्टेशन 357 पर 'आरती' (पिता: सुवीर) के नाम भी तीन-तीन बार अलग-अलग EPIC नंबरों के साथ वोटर लिस्ट में शामिल हैं।
श्रावस्ती विधानसभा में चार-चार बार दर्ज मिले मतदाताओं के नाम
तराई और पूर्वांचल क्षेत्र के जनपद श्रावस्ती की 290-श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र में गड़बड़ी का दायरा और भी बड़ा पाया गया है। यहां बूथ संख्या 432, 334 और 336 पर मतदाता 'रोशन लाल' (पिता: कामता प्रसाद, मकान संख्या: 174, आयु: 27 वर्ष) का नाम चार अलग-अलग स्थानों (क्रम संख्या 832, 750, 765, 777) पर चार अलग EPIC नंबरों के साथ पंजीकृत है।
इसी प्रकार, पोलिंग स्टेशन संख्या 287, 288 और 292 पर मतदाता 'अनीश' (पिता: गुलजार, निवासी: नऊवन पूर्वा) का नाम चार अलग-अलग क्रमों पर दर्ज है। पोलिंग स्टेशन 460 पर 'रिजवान' (पिता: मोहर्रम अली) का नाम भी तीन अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पाया गया है।
सभी 403 विधानसभाओं में भौतिक सत्यापन की मांग
समाजवादी पार्टी ने ज्ञापन के माध्यम से मुख्य निर्वाचन अधिकारी से पुरजोर मांग की है कि विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 को पारदर्शी, निष्पक्ष, स्वतंत्र और भयमुक्त माहौल में संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्येक बूथ पर दर्ज डुप्लीकेट मतदाताओं की गहन जांच कराई जाए।
सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मांग करते हुए कहा कि, 'दर्ज पते पर स्थायी रूप से निवास करने वाले वास्तविक मतदाताओं के अलावा अन्य सभी स्थानों पर अनावश्यक रूप से दर्ज डुप्लीकेट और फर्जी नामों को तत्काल प्रभाव से डिलीट किया जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे।'
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