मानवाधिकार संरक्षण समिति के अध्यक्ष रामजी सुनेजा ने जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक नारेबाजी को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है।
नई दिल्ली: मानवाधिकार संरक्षण समिति के नेशनल प्रेसिडेंट रामजी सुनेजा ने प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू को लेटर लिखकर सितंबर में जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने वालों और ऑर्गनाइज़र के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गंदे और बेइज्ज़ती वाले नारे लगाए गए थे। अपने लेटर में सुनेजा ने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग की, जिसमें देशद्रोह का चार्ज, जंतर-मंतर पर पब्लिक ट्रायल और प्रोटेस्ट में कथित तौर पर शामिल नाबालिगों के माता-पिता के लिए सज़ा शामिल है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन फाइल करने की भी अपील की।
सुनेजा ने प्रदर्शनकारियों पर साधा निशाना
सुनेजा ने कहा कि प्रधानमंत्री पर्सनली अपनी बेइज्ज़ती को माफ कर सकते हैं, लेकिन देश की इमेज को हुआ कथित नुकसान एक अलग मामला है। उन्होंने लिखा, "हालांकि प्रधानमंत्री को अपनी पर्सनल इमेज पर हुए हमलों को माफ करने का अधिकार है, लेकिन देश की ग्लोबल इमेज को हुए नुकसान की भरपाई किसी भी हालत में या किसी भी तरीके से नहीं की जा सकती।" लेटर में कहा गया, कुछ लोगों ने अश्लीलता दिखाई, कुछ लड़कियों ने माननीय प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक और भद्दी भाषा का इस्तेमाल करके सभ्यता की सारी हदें पार कर दीं। सुनेजा ने विरोध प्रदर्शन के आयोजकों को भी ज़िम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि उन्होंने इस तरह के व्यवहार को रोकने या उसकी निंदा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
सुनेजा ने FIR और सख्त कार्रवाई की मांग की
उन्होंने लिखा, इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान करने वाले आयोजकों की पूरी ज़िम्मेदारी है कि वे यह पक्का करें कि प्रदर्शनकारी कानूनी दायरे में रहें, किसी भी उल्लंघन या अश्लीलता को रोकें और उसकी निंदा करें, और यह पक्का करें कि ऐसा दोबारा न हो। कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने कहा, FIR दर्ज की जानी चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने इस घटना की जांच की भी मांग की और कहा कि देश की इज़्ज़त को नुकसान पहुंचाने वालों को सज़ा मिलनी चाहिए। उन्होंने लेटर में कहा, गुनहगारों पर जंतर-मंतर पर सीधे पब्लिक में मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए। नाबालिगों के माता-पिता को भी सज़ा मिलनी चाहिए।
सुनेजा ने एक्टिविस्ट के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की
सुनेजा ने प्रेसिडेंट से एक्टिविस्ट के खिलाफ केस वापस लेने के सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देश का रिव्यू करने की भी अपील की और कहा कि इस तरह की कार्रवाई से ऐसी घटनाएं नहीं रुकी हैं। लेटर में सुनेजा ने ऐसी सज़ाओं की मांग की जो पारंपरिक कानूनी प्रक्रिया से बाहर हों। उन्होंने लिखा, इसलिए इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ देशद्रोह का चार्ज लगाया जाना चाहिए। उन्हें वहीं सज़ा मिलनी चाहिए जहां उन्होंने गालियां दी थीं और उन पर गोलियों की बौछार होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, उन्हें जूतों की माला पहनाई जानी चाहिए। उनके चेहरे काले कर दिए जाने चाहिए। यह मानते हुए कि देश एक सुधार वाले कानूनी सिस्टम को फॉलो करता है। सुनेजा ने कहा, एक लॉ ग्रेजुएट के तौर पर मुझे पता है कि हमारा देश सुधार वाले कानून को फॉलो करता है, लेकिन मैं यहां रोकथाम वाले कानून की वकालत कर रहा हूं, क्योंकि देश के गौरव को बनाए रखने के लिए खास उपायों की ज़रूरत है। नहीं तो यह ऑर्गनाइज़ेशन इस मामले को लोगों तक पहुंचाएगा ताकि जागरूकता बढ़ाई जा सके और न्याय मिल सके।
(इनपुट: ANI)
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