ग्वालियर। शहर में हुए 2.52 करोड़ रुपये के हाई-प्रोफाइल 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी मामले में पुलिस को एक और...
ग्वालियर। शहर में हुए 2.52 करोड़ रुपये के हाई-प्रोफाइल 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में दिल्ली के लक्ष्मी नगर से तीन और जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जिनका संबंध मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से है।
दिल्ली से हुई गिरफ्तारी
ग्वालियर पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने दिल्ली में छापेमारी कर छिंदवाड़ा के रहने वाले तीन आरोपियों को दबोचा है। ये आरोपी ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करते थे। लक्ष्मी नगर में छिपे इन आरोपियों की गिरफ्तारी से इस बड़े सिंडिकेट का राज खुला है।
यह था पूरा मामला
यह मामला भारतीय वायु सेना (IAF) के एक रिटायर्ड अधिकारी डॉ. नारायण महादेव टिकेकर से जुड़ा है। ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये लूटे थे।
इस तरह फंसाया
जालसाजों ने खुद को पुलिस और जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया। उन्होंने दावा किया कि अधिकारी के दस्तावेजों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।
कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा
पीड़ित को कई दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए "डिजिटल अरेस्ट" में रखा गया, जिससे वे किसी से संपर्क न कर सकें। मानसिक दबाव और गिरफ्तारी के डर से पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में कुल 2.52 करोड़ रुपये ठगों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
फिर हुआ ठगी का एहसास
जब बैंक को संदिग्ध ट्रांजेक्शन का शक हुआ और उन्होंने संपर्क किया, तब जाकर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। ग्वालियर पुलिस ने इस मामले में पहले भी कुछ गिरफ्तारियां की थीं। जांच में पता चला है कि ठगी की रकम 300 से ज्यादा अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई थी।
किराए पर खाता उपलब्ध कराते थे
हालिया गिरफ्तारी में पकड़े गए आरोपी ठगों को 'किराये' पर बैंक खाते मुहैया कराते थे ताकि पुलिस को उन तक पहुंचने में मुश्किल हो। डिजिटल अरेस्ट जैसा कानून में कोई प्रावधान नहीं है। यदि कोई आपको वीडियो कॉल पर अरेस्ट करने की धमकी दे या पैसे की मांग करे, तो शिकायत करें।
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