MP News : शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल ज़िले के जंगलों में रविवार और सोमवार को दो बाघ मृत पाए गए, जिससे इस वर्ष राज्य में..
MP News : शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल ज़िले के जंगलों में रविवार और सोमवार को दो बाघ मृत पाए गए, जिससे इस वर्ष राज्य में बाघों की मौत का आंकड़ा 10 हो गया है। यह घटनाक्रम वन्यजीव अधिकारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है, खासकर तब जब पिछले साल राज्य में 55 से अधिक बाघों की मौत हुई थी। यह संख्या प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद सबसे अधिक है।
जैसिंहनगर रेंज के बनछचर गांव में मिले बड़े बिल्लियों के शव
अधिकारियों के अनुसार, बड़े बिल्लियों के शव शहडोल ज़िले के नॉर्थ फ़ॉरेस्ट डिविज़न की जैसिंहनगर रेंज के बनछचर गांव में मिले। रविवार शाम एक मादा बाघ का शव मिला, जबकि सोमवार सुबह लगभग 100 मीटर दूर एक नर बाघ मृत पाया गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया।
फसलों को बचाने बिजली का तार लगाया गया
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति ने बताया, “एक बाघ की मौत क्षेत्रीय संघर्ष में हुई प्रतीत होती है, जबकि दूसरे की मौत करंट लगने से हुई।” उन्होंने कहा, “जांच पूरी होने तक हम करंट लगने के मामले में शिकार की आशंका से इनकार नहीं कर रहे हैं। हमने इस मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली है और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। उनका कहना है कि फसलों को बचाने के लिए बिजली का तार लगाया गया था, जिससे करंट लग गया।”
पिछले साल 55 बाघों की हुई मौत
पिछले साल दिसंबर तक मध्य प्रदेश में कुल 55 बाघों की मौत दर्ज की गई थी। यह 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने के बाद से सबसे अधिक है। उससे पहले वाले वर्षों में 46, 45, 43 और 34 बाघों की मौत दर्ज हुई थी।
इनमें से 11 अस्वभाविक, 8 करंट से हुई मौत
अधिकारियों का अनुमान है कि पिछले साल हुई 55 मौतों में से 11 अस्वाभाविक कारणों से हुईं। इनमें से लगभग आठ मौतें करंट लगने से हुईं, जो मुख्यतः किसानों द्वारा फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए बिछाए गए अवैध तारों के कारण थीं। जनवरी में ही मध्य प्रदेश में आठ बाघों की मौत हो चुकी थी, जिनमें एक शावक भी शामिल था। इनमें से पांच मौतें बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में और तीन पेंच टाइगर रिज़र्व में हुईं।
लाइन-पेट्रोलिंग करने के निर्देश
शहडोल और अन्य संवेदनशील वन प्रभागों में ज़मीनी स्तर पर कर्मचारियों को फसल–वन सीमा के किनारे निरंतर लाइन-पैट्रोलिंग शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, विशेषकर सिंचित क्षेत्रों में जहां किसान खेतों तक बिजली लाइनें ले जाते हैं। टीमें हर शाम और सुबह ढीले व अवैध रूप से खींचे गए लाइव तारों को ट्रेस कर हटाने का काम कर रही हैं, क्योंकि इसी समय बाघ और अन्य वन्यजीव जंगल से बाहर निकलते हैं।
त्वरित संवेदनशीलता मैपिंग शुरू की
वन अधिकारियों ने शहडोल और आसपास की रेंजों में सिंचाई क्षेत्रों की त्वरित संवेदनशीलता मैपिंग भी शुरू की है। बीट गार्ड और रेंज अधिकारी पंप कनेक्शन, मौसमी सिंचाई नालों और फसल-क्षति वाले गलियारों के नक्शे तैयार कर उन्हें प्राथमिक गश्ती क्षेत्र के रूप में चिन्हित कर रहे हैं। साथ ही, स्थानीय बिजली वितरण कर्मचारियों के साथ संयुक्त टीमें सक्रिय करने की योजना है, ताकि “अनधिकृत कृषि बिजली कनेक्शन काटे जा सकें और अवैध रूप से बढ़ाई गई लाइनों की पहचान की जा सके।”
वन व बिजली विभाग के अधिकारी करेंगे दौरा
एक वन्यजीव अधिकारी ने कहा, “कई गांवों में हालिया बाघ मौतों के बाद जिन खेतों में लाइव तार पाए गए हैं, वहां वन और बिजली विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से दौरा करेंगे, पंप और केबल की व्यवस्था का दस्तावेजीकरण करेंगे और असुरक्षित वायरिंग पर नोटिस जारी करेंगे।”
सिंचाई को करेंट लगाया, इससे बाघों की मौत में वृद्धि
कृष्णमूर्ति ने बताया कि इस समय किसान फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, जिससे करंट लगने से बाघों की मौत में बढ़ोतरी हुई हो सकती है। हमने सभी ऐसे लाइव तारों की पहचान कर ली है जो खतरा पैदा कर सकते हैं और जहां सिंचाई चल रही है, उन सभी संवेदनशील हिस्सों का सर्वे कर रहे हैं ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया था
20 जनवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में बाघों की मौत में वृद्धि को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। अदालत यह सुनवाई वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर याचिका पर कर रही थी।
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