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उज्जैन कलाकार ने अनाज से बनाई गांधी की तस्वीर

उज्जैन के कलाकार ने अनाज के दानों से बनाई महात्मा गांधी की अनोखी तस्वीर, कला से दिया अन्न के सम्मान का संदेश

गांधी जयंती पर उज्जैन में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने का एक अनोखा तरीका देखने को मिला।

उज्जैन के कलाकार ने अनाज के दानों से बनाई महात्मा गांधी की अनोखी तस्वीर कला से दिया अन्न के सम्मान का संदेश

Ujjain Artist Creates Gandhi Portrait Using Grains |

उज्जैन {मध्य प्रदेश}: गांधी जयंती पर उज्जैन में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने का एक अनोखा तरीका देखने को मिला। शहर के कलाकार रवि आकोदिया ने किसी रंग या पेंट की जगह दाल, चावल और अलग-अलग अनाज के दानों से महात्मा गांधी का पोर्ट्रेट तैयार किया। इस कलाकृति के जरिए उन्होंने कला के साथ अन्न के सम्मान का संदेश देने की कोशिश की।

दाल-चावल के दानों से तैयार किया पोर्ट्रेट

रवि ने सबसे पहले कैनवास पर महात्मा गांधी का स्केच बनाया। इसके बाद एक-एक अनाज के दाने को गोंद की मदद से तस्वीर के अलग-अलग हिस्सों में चिपकाया। करीब 4 से 5 घंटे की मेहनत के बाद गांधी जी का यह अनोखा पोर्ट्रेट तैयार हुआ। इस कलाकृति में करीब 5 से 6 प्रकार की दाल, चावल और अन्य अनाज का इस्तेमाल किया गया। पूरी तस्वीर को तैयार करने में लगभग 1 से 1.5 किलो अनाज लगा।

घर में इस्तेमाल होने वाले अनाज से बनाई तस्वीर

खास बात यह है कि इस कलाकृति के लिए किसी महंगे सामान की खरीदारी नहीं की गई। रवि ने घर में रोजाना इस्तेमाल होने वाले अनाज से ही गांधी जी की तस्वीर तैयार की। उनका कहना है कि इस प्रयास के जरिए उन्होंने अन्न की महत्ता और उसे सम्मान देने का संदेश देने की कोशिश की है।

10 साल से अलग अंदाज में दे रहे श्रद्धांजलि

रवि पिछले 10 साल से गांधी जयंती के अवसर पर अलग-अलग माध्यमों से महात्मा गांधी की तस्वीर बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि देते आ रहे हैं। साल 2025 में उन्होंने बालू-रेत से गांधी जी की तस्वीर तैयार की थी। इस बार उन्होंने कम बारिश के बीच अनाज को माध्यम बनाकर अपनी कलाकृति तैयार की।

कहा- आत्मसंतुष्टि के लिए करता हूं यह काम

पेशे से पंजाब नेशनल बैंक में कर्मचारी रवि का कहना है कि वह किसी पुरस्कार या सम्मान के लिए यह काम नहीं करते, बल्कि आत्मसंतुष्टि और महात्मा गांधी को अपने अंदाज में याद करने के लिए हर साल कुछ अलग करने का प्रयास करते हैं। उनके मुताबिक, गांधी जी को केवल तस्वीरों में याद करना ही पर्याप्त नहीं है। सत्य और अहिंसा के उनके विचारों को जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

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