मध्य प्रदेश के उमरिया में पीएम श्री कन्या शिक्षा परिसर में छात्रवृत्ति और शासकीय राशि में कथित अनियमितताओं की जांच में देरी को लेकर शिकायतकर्ताओं ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
उमरिया: मध्य प्रदेश में उमरिया जिला के बिरसिंहपुर पाली पीएम श्री कन्या शिक्षा परिसर बिरसिंहपुर पाली में छात्रवृत्ति एवं अन्य शासकीय राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर शिकायतकर्ताओं का आक्रोश अब धरने और अनशन तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता बसंत कुमार तिवारी और अरुण कुमार विश्वकर्मा ने प्रशासन पर मामले को लंबित रखने का आरोप लगाते हुए अंबेडकर चौराहा में आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ की गई कार्रवाई
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर पीएम श्री कन्या शिक्षा परिसर में आदिवासी छात्राओं की छात्रवृत्ति, शासकीय मद की राशि और अन्य वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बाद जांच दल का गठन तो किया गया, लेकिन अब तक जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक नहीं किया गया और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
अनशनकारियों ने प्रशासन के समक्ष रखीं पांच सूत्रीय मांगें
अनशन पर बैठे शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच में हो रही देरी से पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो छात्राओं को न्याय मिलने में और अधिक विलंब होगा। अनशनकारियों ने प्रशासन के समक्ष पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें जांच दल की रिपोर्ट सार्वजनिक करना, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना, छात्राओं से ली गई कथित राशि वापस कराना, सभी आवश्यक पाठ्य पुस्तकें एवं शैक्षिक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराना और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना शामिल है।
दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की मांग
अंबेडकर चौराहा में चल रहे इस अनशन को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की भी नजर बनी हुई है। क्षेत्र में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोगों का कहना है कि अगर शिकायतों में तथ्य हैं तो दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। फिलहाल शिकायतकर्ता अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मामले में क्या निर्णय लेता है।
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