सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है...
मानवता शर्मसार, नहीं मिली एंबुलेंस तो परिजन को स्कूटी पर ले जाना पड़ा पार्थिव शरीर
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सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के सेमरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में इलाज न मिलने और बाद में शव ले जाने के लिए एंबुलेंस मुहैया न कराए जाने के कारण परिजनों को अपने पिता का शव स्कूटी पर बीच में लादकर ले जाना पड़ा।
सेमरिया अस्पताल ले गये, नहीं था कोई डॉक्टर
यह मामला बुधवार रात करीब 12 बजे का है। परिजनों के अनुसार, मृतक की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आनन-फानन में सेमरिया अस्पताल लाया गया था, लेकिन आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर तैनात नहीं था।
आरोप, पिता तड़पते रहे पर कोई सुनने वाला नहीं था
मृतक के बेटों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पिता तड़पते रहे, लेकिन अस्पताल में कोई सुनने वाला नहीं था। इलाज समय पर न मिलने के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया। जब परिजनों ने डॉक्टर की तलाश की, तो कथित तौर पर उन्हें जवाब मिला कि "डॉक्टर साहब डिनर करने गए हैं।"
लापरवाह सिस्टम, मजबूर आम आदमी
मौत के बाद जब परिजनों ने शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन की मांग की, तो उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
स्कूटी पर ले जाना पड़ पार्थिव शरीर
काफी देर तक अस्पताल के गेट पर रोने-बिलखने और गुहार लगाने के बाद भी जब कोई मदद नहीं मिली, तो मजबूर बेटों ने अपने पिता के शव को एक स्कूटी पर बीच में रखा और उसे पकड़कर घर ले गए। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है।
दर्द में परिजन, बयां की अपनी व्यथा
परिजनों का दर्द, अगर समय पर डॉक्टर मिल जाते तो शायद हमारे पिता आज जिंदा होते। मौत के बाद हमें अपने पिता के शव को स्कूटी पर ले जाने के लिए मजबूर किया गया, यह हमारे लिए सबसे बड़ा दुख है।
यह ग्रामीण मप्र की हृदयविदारक तस्वीर
फिलहाल इस मामले में उच्च अधिकारियों द्वारा जांच की बात कही जा रही है। यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से इस तरह की तस्वीरें आई हैं, जो 'सरकारी दावों' और 'जमीनी हकीकत' के बीच के बड़े अंतर को उजागर करती हैं।
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