उत्तर प्रदेश सरकार बालवाटिका शिक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए प्रदेशभर की बालवाटिकाओं तक विशेष शैक्षणिक सामग्री पहुंचा रही है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार बालवाटिका शिक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए प्रदेशभर की बालवाटिकाओं तक विशेष शैक्षणिक सामग्री पहुंचा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों को खेल, गतिविधियों और रोचक तरीकों से सीखने का अवसर देना है, ताकि उनकी शुरुआती शिक्षा मजबूत हो सके।
हर बालवाटिका को मिलेगा शैक्षणिक किट
सरकार की ओर से प्रत्येक बालवाटिका में एजुकेटर गाइड, बच्चों की वर्कबुक, बिग बुक्स और समग्र प्रगति कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण में मदद मिलेगी और बच्चों का सीखना अधिक आसान और आनंददायक बनेगा।
क्यूआर कोड से होगी निगरानी
शैक्षणिक सामग्री की आपूर्ति और वितरण की निगरानी के लिए क्यूआर कोड और ‘किताब वितरण ऐप’ का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर तक सामग्री की उपलब्धता पर नजर रखी जाएगी।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार सामग्री
बालवाटिका के लिए तैयार की गई सामग्री राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एफएस) के अनुरूप विकसित की गई है। इसमें बच्चों की उम्र और सीखने की क्षमता को ध्यान में रखा गया है।
पांच प्रमुख क्षेत्रों के विकास पर फोकस
यह शैक्षणिक सामग्री बच्चों के शारीरिक, बौद्धिक, भाषाई, सामाजिक-भावनात्मक और रचनात्मक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की गई है। कहानियां, चित्र, संवाद और विभिन्न गतिविधियां बच्चों की जिज्ञासा और कल्पनाशक्ति को विकसित करेंगी।
स्कूल रेडीनेस को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों के भविष्य की नींव होती है। प्रशिक्षित शिक्षकों, बाल-अनुकूल सामग्री और तकनीक आधारित निगरानी के जरिए बच्चों के लिए विद्यालय का पहला अनुभव अधिक रोचक, समावेशी और प्रभावी बनाया जा रहा है।
बुनियादी शिक्षा सुधारों को मिलेगी मजबूती
यह पहल निपुण भारत मिशन, आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान जैसे कार्यक्रमों को मजबूत आधार देने के साथ-साथ बच्चों को विद्यालयी जीवन के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने में भी मददगार साबित होगी।
यह भी पढ़े: राजमिस्त्री को लाठी-रॉड से पीटने का आरोप, पंचायत प्रभारी सचिव सहित अन्य पर मामला दर्ज