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एसपी गोयल ने दो पुस्तकों का किया विमोचन

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने डॉ. राजेश सिंह की दो पुस्तकों का किया विमोचन, बोले- साहित्य समाज को नई दिशा देता है

लखनऊ में मुख्य सचिव एसपी गोयल ने डॉ. राजेश सिंह की दो पुस्तकों का विमोचन किया। उन्होंने साहित्य को समाज को नई दिशा और दृष्टि देने का सशक्त माध्यम बताया।

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने डॉ राजेश सिंह की दो पुस्तकों का किया विमोचन बोले- साहित्य समाज को नई दिशा देता है

UP Chief Secretary Releases Two Books by Dr Rajesh Singh in Lucknow |

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में दो पुस्तकों का विमोचन किया। ये पुस्तकें प्रमुख सचिव, विधान परिषद डॉ. राजेश सिंह द्वारा लिखी गई हैं। इनमें 'चलते-चलते एक यात्रा वृत्तांत' और 'मथुरा' शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने लेखक को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की गणमान्य हस्तियां और साहित्यप्रेमी भी मौजूद रहे।

साहित्य समाज को नई दिशा और दृष्टि प्रदान करता है: मुख्य सचिव

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कहा कि साहित्य केवल विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को नई दिशा, नई दृष्टि और सकारात्मक सोच प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज की संवेदनाओं, अनुभवों और सांस्कृतिक मूल्यों को अभिव्यक्त करता है। इसके माध्यम से लोगों को अपने परिवेश और विरासत को समझने का अवसर मिलता है।

यात्रा वृत्तांत साहित्य की महत्वपूर्ण विधा: एसपी गोयल

मुख्य सचिव ने कहा कि यात्रा वृत्तांत साहित्य की एक महत्वपूर्ण और रोचक विधा है। यात्रा के दौरान व्यक्ति विभिन्न स्थानों की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक जीवन और प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित होता है। इसके साथ ही वहां के लोगों के रहन-सहन और उनके अनुभवों को समझने का अवसर मिलता है। इन अनुभवों को शब्दों के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना एक महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्य है।

उन्होंने कहा कि यात्रा वृत्तांत के माध्यम से पाठक बिना किसी स्थान पर गए भी वहां की विशेषताओं, परिस्थितियों और जीवनशैली को समझ सकते हैं।

डॉ. राजेश सिंह ने साझा की पुस्तक लेखन की प्रक्रिया

कार्यक्रम में लेखक एवं प्रमुख सचिव, विधान परिषद डॉ. राजेश सिंह ने अपनी पुस्तक 'चलते-चलते एक यात्रा वृत्तांत' की रचना प्रक्रिया और उससे जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में अपनी यात्राओं के अनुभवों, भावनाओं और जीवन के विभिन्न पहलुओं को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि एक साहित्यकार का जीवन सामान्य जीवन से अलग होता है। वह केवल घटनाओं और परिस्थितियों को देखता ही नहीं, बल्कि उन्हें अपनी संवेदनाओं, विचारों और अनुभवों के माध्यम से आत्मसात भी करता है।

हर यात्रा एक नया अनुभव और हर स्थान एक नई कहानी: डॉ. राजेश सिंह

डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि साहित्यकार की दृष्टि में हर यात्रा एक नया अनुभव, हर स्थान एक नई कहानी और हर मुलाकात जीवन को समझने का नया अवसर होती है। यही संवेदनशील दृष्टि साहित्यकार को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। उन्होंने अपनी पुस्तक के माध्यम से यात्राओं से जुड़े अनुभवों और जीवन के विविध पहलुओं को पाठकों तक पहुंचाने की बात कही।

सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक मूल्यों को समझना जरूरी

डॉ. राजेश सिंह ने भारत की समृद्ध संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये हमें सदैव सत्य, सद्भाव और जीवन में सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने इतिहास को केवल पढ़ने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे गहराई से समझने और उसके वास्तविक स्वरूप एवं तथ्यों को जानने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक मूल्यों को समझना तथा उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।

कार्यक्रम में न्यायमूर्ति और विश्वविद्यालय के कुलपति रहे मौजूद

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पी.के. श्रीवास्तव और डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति संजय सिंह सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। इस अवसर पर दोनों पुस्तकों के माध्यम से साहित्य, यात्रा अनुभवों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विचारों को साझा किया गया।

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