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लेवल-2 और लेवल-3 स्तर के 8,689 डॉक्टरों की कमी

यूपी में चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में डाक्टरों की भारी कमी से जिलों और तहसीलों के अस्पतालों में मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

यूपी में चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं

यूपी में चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं

राज्य में लेवल-2 और लेवल-3 स्तर के 8,689 डॉक्टरों की कमी

लखनऊ। 
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में डाक्टरों की भारी कमी से जिलों और तहसीलों के अस्पतालों में मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की तरफ से शासन को भेजी रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के अस्पतालों में करीब 8,689 डॉक्टरों की कमी है। मिली जानकारी के अनुसार लेवल-2 और लेवल-3 स्तर के डाक्टरों की सबसे ज्यादा कमी है जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित जिलों के अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। प्रदेश में डाक्टरों की कमी को देखते हुए शासन स्तर पर चिकित्सकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू तो हुई, लेकिन विभिन्न कारणों से एक भी डाक्टर की भर्ती नहीं हो पाई।

स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा शासन को भेजी गयी रिपोर्ट के अनुसार लेवल-2 के डाक्टरों के 7240 पदों में से 5497 पद खाली हैं। इसी प्रकार लेवल-3 में डाक्टरों के 5199 पद हैं, लेकिन 2007 डाक्टर ही उपलब्ध हैं। इसके अलावा संयुक्त निदेशक स्तर के 2858 पदों में से 1330 पद खाली, डेंटल सर्जन के 70 में से 58 और साधारण ग्रेड के डेंटल सर्जन के 970 पदों में से 157 पद खाली हैं। जागरूकता और हेल्थ कैम्प जैसे स्वास्थ्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 8853 पदों में से 6364 पद खाली हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने 601 विशेषज्ञ, 1790 एमबीबीएस डाक्टरों की भर्ती के लिए नवम्बर 2025 में आवेदन आमंत्रित किये थे। जनवरी 2026 में हुए इन्टरव्यू लेकिन 30 जनवरी को आने वाला परिणाम मेरिट और पारदर्शिता की भेंट चढ़ गयी। स्टाफ नर्स के 8113 पदों में से 3257 पर भर्ती नहीं हुई।

स्वास्थ विभाग की भर्ती प्रक्रिया के तहत“वाक् इन इन्टरव्यू”में बीते वर्ष दिसंबर में 2300 से अधिक पदों के लिए हुआ इन्टरव्यू लेकिन एक भी भर्ती नहीं हो सकी। इस संबंध में बात करने पर प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य ने बताया कि शासन स्तर पर विभागीय भर्तियों के लिए“मेडिकल भर्ती बोर्ड”बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि“मेडिकल भर्ती बोर्ड”बन जाने बाद अब इस प्रक्रिया में देरी नहीं होगी। सभी भर्तियां“वाक् इन इन्टरव्यू” से की जायेंगी।

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