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योगी सरकार 2.O का 9.12 लाख करोड़ का बजट पेश, निवेश-रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ रुपये का बजट विधान सभा पेश हुआ। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल के आखिरी बजट को विधानसभा में पेश किया।

योगी सरकार 2o का 912 लाख करोड़ का बजट पेश निवेश-रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

UP Presents Record ₹9.12 Lakh Crore Budget |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ रुपये का बजट विधान सभा पेश हुआ। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल के आखिरी बजट को विधानसभा में पेश किया। इसमें निवेश, रोजगार, बुनियादी विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष ध्यान रखा गया है। यह यूपी के इतिहास का सबसे बड़ा बजट माना जा रहा है। इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ और उनकी कैबिनेट के सभी मंत्री विधानसभा में मौजूद रहे। अगले साल 2027 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह बजट योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट है।

1.20 लाख रुपये हुई प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि आज प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय एक लाख 20 हजार हो गई है। योगी सरकार में 6 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया है। विधानसभा में अपना 10वां बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना शायराना अंदाज में दिखे। उन्होंने कुछ शायरी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा,“यही जुनून, यही ख्वाब मेरा है। दिया जला के रोशनी कर दूं जहाँ अंधेरा है।” इसके बाद उन्होंने एक और शायरी का जिक्र किया, “सितारा बन के आसमां में वही चमकते हैं, डुबो देते हैं जो अपने आपको पसीने में।”मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ में उन्होंने कहा, “काबिले तारीफ है, अंदाज एक-एक काम का। गा रहा है गीत यूपी, योगी जी के नाम का।”

2025-2026 की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक है बजट का आकार

वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-2027 का बजट प्रस्तुत करते हुए अपने संबोधन में बताया कि बजट का आकार 9,12,696.35 करोड़ रूपये (09 लाख 12 हजार 696 करोड़ 35 लाख रूपये) है जो वित्तीय वर्ष 2025-2026 की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक है। इस बजट में पूंजीगत परिव्यय 19.5 प्रतिशत है। शिक्षा तथा चिकित्सा हेतु आवंटन कुल बजट का क्रमशः 12.4 प्रतिशत एवं 6 प्रतिशत है। कृषि और सम्बद्ध सेवाओं के लिये आवंटन कुल बजट का 9 प्रतिशत है।

3 प्रतिशत रखी गई राजकोषीय घाटे की सीमा, 2030-2031 तक रहेगी लागू

उन्होंने बताया कि 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की संस्तुतियों जिन्हें केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकार किया गया है, के क्रम में वित्तीय वर्ष 2026-2027 में राजकोषीय घाटे की सीमा 3 प्रतिशत रखी गई है जो वर्ष 2030-2031 तक लागू रहेगी। राज्य सरकार सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन एवं ऋण नियंत्रण के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

2024-25 तक Debt-to-GSDP घटकर 28.0 प्रतिशत रहने का अनुमान

कार्यभार ग्रहण करने के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की योगी सरकार को 2016-17 में 29.3 प्रतिशत की उच्च ऋण-जीएसडीपी (Debt-to-GSDP) अनुपात वाली अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी। कड़े वित्तीय प्रबंधन के कारण, यह अनुपात 2019-20 तक घटाकर 27.9 प्रतिशत किया गया, और 2024-25 तक घटकर 28.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो राष्ट्रीय व वैश्विक औसत से काफी कम है। परंतु, कोविड-19 महामारी के अभूतपूर्व आर्थिक प्रभाव के कारण यह अनुपात बढ़कर वर्ष 2021-22 में 33.4 प्रतिशत हो गया है।

2026-27 में Debt-to-GSDP 23.1 प्रतिशत तक लाने का है लक्ष्य

वित्त मंत्री ने कहा कि सुनियोजित राजकोषीय प्रबन्धन के परिणामस्वरूप वर्ष 2024-25 में ऋण-जीएसडीपी अनुपात को पुनः घटाकर 27 प्रतिशत से नीचे लाया जा चुका है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसे और कम कर 23.1 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है। इतना ही नहीं, बजट के साथ प्रस्तुत मध्यकालीन राजकोषीय नीति में राज्य सरकार इसे चरणबद्ध रूप से 20 प्रतिशत से नीचे लाने के लिए दृढ़ संकल्पित है, जिससे राज्य की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता एवं सतत विकास सुनिश्चित हो सके।

चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण :-

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिये 37,956 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है जो 2025-2026 की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम प्रदेश के समस्त जनपदों में लागू है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रसव हेतु आने वाली गर्भवती महिलाओं को गारन्टीड कैशलेस डिलीवरी सेवा प्रदान करना है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रत्येक ब्लॉक में दो मेडिकल टीमें तैनात की गई जो आंगनबाडी केन्द्रों तथा स्कूलों में जा कर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। प्रदेश के समस्त जनपदों में दिनाँक 08 दिसम्बर, 2024 से संचालित पल्स पोलियो अभियान के अन्तर्गत 03 करोड़ 28 लाख 44 हजार 929 बच्चों को पोलियो ड्राप पिलायी गयी। जपानी इन्सेफिलाईटिस से बचाव हेतु प्रदेश के संवेदनशील 42 जनपदों में टीकाकरण कार्यक्रम निर्बाध रूप से संचालित है।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन हेतु 8,641 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित

बजट में आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के अन्तर्गत लाभार्थी परिवारों की संख्या 49.22 लाख है। योजना हेतु 500 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित है। एकीकृत डिजीज सर्विलांस पोर्टल पर जनपद स्तर से सरकारी क्षेत्र के साथ निजी क्षेत्र की चिकित्सा इकाइयों द्वारा नियमित रूप से 16 संक्रामक रोगों, 6 वैक्सीन प्रिवेंटेबल डीजिजेज एवं कोविड-19 की रिपोर्टिंग की जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन हेतु लगभग 8,641 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन हेतु 2,000 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

आयुष सेवा :-

आयुष सेवाओं के लिये लगभग 2,867 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में वर्तमान में 2,111 आयुर्वेदिक, 254 यूनानी एवं 1,585 होम्योपैथिक चिकित्सालयों के साथ ही 08 आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एवं उनसे सम्बद्ध चिकित्सालय, 02 यूनानी मेडिकल कालेज एवं उससे सम्बद्ध चिकित्सालय तथा 09 होम्योपैथिक मेडिकल कालेज एवं उनसे सम्बद्ध चिकित्सालय क्रियाशील हैं। आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालयों में प्रमाणित एवं गुणकारी औषधियों की आपूर्ति की व्यवस्था हेतु प्रदेश में 02 राजकीय औषधि निर्माणशालाएं लखनऊ एवं पीलीभीत में संचालित हैं जिनको सुदृढ़ करते हुये इनकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि किये जाने का प्रयास किया जा रहा है।

चिकित्सा शिक्षा:-

चिकित्सा शिक्षा के लिये 14,997 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। वर्तमान में प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज हैं जिनमें 45 राज्य सरकार द्वारा संचालित हैं एवं 36 निजी क्षेत्र द्वारा संचालित हैं। वर्तमान में 60 जनपद मेडिकल कालेज की सुविधाओं से आच्छादित हैं। 16 असेवित जनपदों में मेडिकल कालेजों की स्थापना पी.पी.पी. पद्धति से की जानी है। राजकीय तथा निजी क्षेत्र के मेडिकल चिकित्सा संस्थानों में एम.बी.बी.एस. सीटों की संख्या वर्ष 2017 में 4,540 थी जिसे बढ़ाकर 12,800 किया गया।

सड़क एवं सेतुओं के निर्माण, चौड़ीकरण :-

सड़कों एवं सेतुओं के निर्माण, चौड़ीकरण एवं अनुरक्षण हेतु बजट में 34,468 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रदेश में नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के विकास हेतु मार्गों के चौडीकरण/सुदृढ़ीकरण/निर्माण हेतु 400 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रदेश में सेतुओं हेतु 4,808 करोड़ रूपये एवं रेल उपरिगामी/अधोगामी सेतुओं के निर्माण हेतु 1,700 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। राज्य/प्रमुख/अन्य जिला मार्गों के चौड़ीकरण/सुदृढ़ीकरण कार्यों हेतु 3,700 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। राज्य सड़क निधि से सड़कों के अनुरक्षण हेतु 3,000 करोड़ रूपये तथा सड़कों के निर्माण/चौड़ीकरण/सुदृढ़ीकरण हेतु 3,000 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। शहरवासियों के आवागमन को सुगम बनाने दृष्टिगत शहरों के बाईपास एवं रिंगरोड तथा चौराहों पर फ्लाईओवर आदि के निर्माण हेतु 1,500 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। औद्योगिक/लॉजिस्टिक पार्क हेतु मार्गों के चौड़ीकरण/सुदृढ़ीकरण/निर्माण कार्य हेतु 1,000 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति :-

बजट में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति हेतु लगभग 22,676 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। योजना के अन्तर्गत प्रदेश के समस्त 2.67 करोड़ ग्रामीण परिवारों को क्रियाशील गृह नल संयोजन प्रदान करने के लक्ष्य के सापेक्ष 2.43 करोड़ घरों में क्रियाशील गृह नल संयोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाये रखने एवं उसमें दूषित जल का उत्प्रवाह रोकने के लिये सीवरेज संबंधी कुल 74 परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। अब तक 41 परियोजनाएं पूर्ण कर संचालित की जा रही हैं तथा शेष परियोजनाएं निर्माणाधीन है।

आई.टी.एवं इलेक्ट्रॉनिक्स :-

आई.टी. एवं इलेक्ट्रॉनिक्स की योजनाओं के लिए 2,059 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है जो वर्ष 2025-2026 की तुलना में 76 प्रतिशत अधिक है। एआई के क्षेत्र में विकास हेतु उत्तर प्रदेश एआई मिशन का आरम्भ किया जा रहा है जिसके लिये 225 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इण्डिया एआई मिशन के साथ प्रदेश की 49 आई.टी.आई. को एआई लैब के साथ ही राज्य में एआई सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस तथा इण्डिया एआई डाटा लैब्स की स्थापना हेतु 32 करोड़ 82 लाख रूपये की व्यवस्था है। साइबर सुरक्षा संचालन केन्द्र की स्थापना की नई योजना प्रस्तावित की जा रही है जिसके लिये 95 करोड़ 16 लाख रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम :-

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सेक्टर (एमएसएमई) की योजनाओं के लिये 3,822 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है जो वर्ष 2025-2026 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग उत्तर प्रदेश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है। लगभग 3.11 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर देश के सभी राज्यों में अग्रणी है। प्रदेश में एम.एस.एम.ई. उद्योगों को प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से "सरदार वल्लभ भाई पटेल इम्प्लायमेन्ट एण्ड इण्डस्ट्रियल जोन" की नई योजना प्रस्तावित की जा रही है जिसके लिए 575 करोड़ रूपये की व्यवस्था का प्रस्ताव है।

युवा उद्यमी विकास अभियान के लिए ₹1000 करोड़ प्रस्तावित

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान हेतु 1,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। योजना के अन्तर्गत प्रतिवर्ष 01 लाख सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना का लक्ष्य है परन्तु आवश्यकतानुसार इसे बढाया जाएगा। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना हेतु 225 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। "एक जनपद एक व्यंजन" जो एक नई योजना है, के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

₹30 हजार करोड़ की निवेश से 8 डाटा सेन्टर पार्क की होगी स्थापना

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एआई-प्रजा कार्यक्रम की शुरूआत की गई है और इस पहल में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, इंटेल, आईबीएम, और वन एम वन बी जैसी वैश्विक स्तर की कम्पनियाँ एआई प्रशिक्षण में हमारे साथ काम कर रही हैं जिसमें किसानों, स्वयं सहायता समूहों, विद्यार्थियों, डॉक्टरों सहित राजकीय अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश में 30,000 करोड़ रूपये के अनुमानित निवेश से 8 डाटा सेन्टर पार्क की स्थापना तथा 900 मेगावॉट क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। अद्यतन 8 परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत किये गये हैं जिनमें 6 डाटा सेन्टर पार्क्स और 2 डाटा सेन्टर इकाईयाँ हैं। इससे लगभग 21,342 करोड़ रुपये का निवेश तथा 644 मेगावॉट की क्षमता अर्जित की गयी।

खादी एवं ग्रामोद्योग

"मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना" के अन्तर्गत वर्ष 2026-2027 में 800 इकाईयों को 40 करोड़ रुपये बैंक ऋण से नये उद्यम स्थापित कराकर 16,000 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराये जाने का लक्ष्य है। पं. दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजनान्तर्गत ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित इकाईयों को बैंक ऋण पर ब्याज उपादान की सुविधा हेतु 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। कम्बल उत्पादन केन्द्र, खजनी, गोरखपुर के आधुनिकीकरण की नई योजना प्रस्तावित की जा रही है जिसके लिये 07 करोड़ 50 लाख रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा माटीकला के परम्परागत कारीगरों के चहुँमुखी विकास हेतु संचालित माटीकला समन्वित विकास कार्यक्रम के लिए 13 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास :-

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास की योजनाओं के लिए 27,103 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है जो वर्ष 2025-2026 की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है। मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण एवं नये औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना हेतु 5,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तिकरण योजना में टैबलेट/स्मार्ट फोन के वितरण की प्रक्रिया गतिमान है। इस योजना हेतु 2,374 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। अटल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत अवस्थापना विकास हेतु 2,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। फॉरेन डाइरेक्ट इन्वेस्टमेन्ट एवं फॉर्च्यून-500 कम्पनियों के निवेश हेतु घोषित प्रोत्साहन नीति-2023 के क्रियान्वयन हेतु 1,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर परियोजना में अब तक 200 रक्षा उद्योगों की स्थापना हेतु एमओयू हस्ताक्षरित किये गये हैं, जिसमें 35,280 करोड़ का निवेश एवं 53,263 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार अनुमानित है।

गांव से दूर काम करने वाले मजदूरों के लिए होगा लेबर अड्डों का निर्माण

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अपने घर, गांव से दूर शहरों में काम करने वाले मजदूरों के लिए लेबर अड्डों का निर्माण कराया जाएगा। एक्स-ग्रेशिया अनुदान के अंतर्गत दिनांक 26.08.2021 से दिनांक 31.03.2022 तक ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत असंगठित श्रमिकों की किसी दुर्घटना में मृत्यु अथवा पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में 2 लाख रुपये तथा आंशिक दिव्यांगता पर 01 लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा है। प्रदेश में पहली बार निर्माण श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण और स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करने हेतु मोबाइल हेल्थ वैन का संचालन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया गया। रोजगार के इच्छुक अभ्यर्थियों/श्रमिकों को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन का गठन किया गया है।

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