लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में पूछे गये एक सवाल को लेकर उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड विवादों में आ गया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में पूछे गये एक सवाल को लेकर उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड विवादों में आ गया है। शनिवार को हुई उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में एक सवाल यह पूछा गया था कि "अवसर के अनुसार बदल जाने वाले" वाक्यांश का सही विकल्प भरें। सही उत्तर के लिए दिये गये समानार्थी शब्दों में एक 'पंडित' शब्द को विकल्प में शामिल करने पर गहरा विवाद छिड़ गया है। इसे ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजनक माना जा रहा है।
विधायकों ने सीएम को लिखा पत्र
मामले को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के कई विधायकों ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति दर्ज करायी है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच और सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
सीएम योगी ने दिए कड़े निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा प्रश्नपत्र प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सभी भर्ती बोर्डों के चेयरपर्सन्स को कड़े निर्देश जारी किए हैं। सीएम ने कहा है कि किसी भी भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में किसी व्यक्ति, जाति, पंथ या सम्प्रदाय की मर्यादा और आस्था को ठेस पहुँचाने वाली टिप्पणी बिल्कुल स्वीकार्य नहीं होगी।
भर्ती बोर्ड ने भी दिए जांच के आदेश
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। भर्ती बोर्ड ने कहा है कि प्रश्नपत्र गोपनीय संस्थाओं द्वारा तैयार किए जाते हैं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बाहरी गोपनीय एजेंसियां तैयार करती हैं पेपर
यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड के चेयरमैन एस.बी. शिरोडकर ने स्पष्ट किया है कि पुलिस भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र स्थानीय स्तर पर तैयार नहीं होते हैं। इन्हें बाहरी ‘अति-गोपनीय’ संस्थाएं सेट करती हैं, जिन्हें बोर्ड का कोई अधिकारी भी परीक्षा से पहले नहीं देख सकता।
परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस विवाद ने एक बार फिर परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही और प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले से पेपर लीक की अफवाहों से घिरी परीक्षा
यूपी पुलिस एसआई परीक्षा 2026 पहले से ही पेपर लीक की फर्जी सूचनाओं को लेकर चर्चा में रही है। इसी बीच प्रश्नपत्र की शब्दावली ने उसके खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया है।
करीब 4500 पदों के लिए हो रही परीक्षा
दरअसल यह विवाद ऐसे समय में आया है जब राज्य में पुलिस उपनिरीक्षक के लगभग 4500 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की जा रही है। उत्तर प्रदेश में पुलिस उपनिरीक्षक (दारोगा) और समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती के लिए लिखित परीक्षा शनिवार से शुरू हो गई है। परीक्षा में करीब 15 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं।
दो दिनों में 75 जिलों में परीक्षा
यह परीक्षा 14 और 15 मार्च को प्रदेश के 75 जिलों में आयोजित की जा रही है। इस बीच 14 मार्च की परीक्षा में पूछे एक प्रश्न को लेकर अब विवाद हो रहा है। इस सवाल में अवसरवादी के पर्यायवाची के तौर पर विकल्प में “पंडित” दिया गया था। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर ये पेपर किसने तैयार किया था?
भविष्य में गलती दोहराने वालों पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने इस मामले में निर्देश दिया है कि इस संबंध में सभी पेपर सेटर्स को स्पष्ट रूप से अवगत कराया जाए और भविष्य में ऐसी गलती दोहराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सीएम ने यह भी कहा कि जो लोग बार-बार ऐसी गलती करते हैं, उन्हें तुरंत प्रतिबंधित किया जाए। इसके साथ ही यह प्रावधान पेपर सेटर्स के एमओयू (MoU) का भी हिस्सा बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह का विवाद पैदा न हो।
यह भी पढ़े: ईरान की अमेरिकी बैंकों को निशाना बनाने की चेतावनी
https://www.primenewsnetwork.in/world/iran-warns-of-targeting-us-banks/149389