यूपी के 43 जिलों में 204 टीएचआर इकाइयों से 4,080 महिलाओं को रोजगार मिला। स्वयं सहायता समूहों ने ₹3,104.23 करोड़ का उत्पादन कर ₹68.8 करोड़ से अधिक की आय अर्जित की।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश के 43 जिलों में संचालित 204 टीएचआर इकाइयों से 4,080 महिलाओं को रोजगार मिला है। स्वयं सहायता समूहों ने अब तक ₹3,104.23 करोड़ मूल्य का टीएचआर उत्पादन कर ₹68.8 करोड़ से अधिक की आय अर्जित की है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूती मिल रही है।
ग्राम्य विकास विभाग की अनूठी पहल
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दिशा-निर्देशन में ग्राम्य विकास विभाग के अधीन उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन स्वयं सहायता समूहों को आजीविका के स्थायी अवसरों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। टीएचआर (टेक होम राशन) उत्पादन इकाइयां इस प्रयास का सशक्त उदाहरण हैं, जहां महिला समूह पोषण सेवाओं की आपूर्ति में योगदान देने के साथ रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
43 जनपदों में 204 इकाइयां, 50 लाख से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच
प्रदेश के 43 जनपदों के 328 विकास खंडों में संचालित 204 टीएचआर उत्पादन इकाइयों के माध्यम से लगभग 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रतिमाह 50 लाख से अधिक लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अनुपूरक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है। यह व्यवस्था महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी को जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जोड़ते हुए पोषण सेवाओं की आपूर्ति और ग्रामीण रोजगार, दोनों को एक साथ आगे बढ़ा रही है।
₹3,104.23 करोड़ मूल्य का उत्पादन, महिला समूहों की बड़ी उपलब्धि
टीएचआर उत्पादन के क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों ने अब तक लगभग 4.37 लाख मीट्रिक टन उत्पादन किया है, जिसका कुल मूल्य ₹3,104.23 करोड़ है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर स्थानीय स्तर पर उत्पादन, रोजगार और आय के अवसरों का विस्तार संभव है।
4,080 महिलाओं को रोजगार, ₹68.8 करोड़ से अधिक की कुल आय
टीएचआर उत्पादन गतिविधियों से अब तक 4,080 महिलाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है और उनकी कुल आय ₹68.8 करोड़ से अधिक रही है। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ परिवार की आय में सहयोग, आत्मविश्वास में वृद्धि और समाज में सम्मानजनक पहचान बनाने के अवसर सृजित हुए हैं।
उद्यमशीलता और आजीविका का नया संबल
यह पहल ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने, महिला समूहों की उद्यमशीलता विकसित करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ समुदाय तक पहुंचाने का प्रभावी उदाहरण है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि स्वयं सहायता समूहों की क्षमता का उपयोग करते हुए ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं को अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बनें और ग्रामीण विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।प्रदेश सरकार की महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण आजीविका संवर्धन और पोषण संबंधी प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने में टीएचआर उत्पादन इकाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
स्वयं सहायता समूहों से महिलाओं को आय और सम्मान
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों को संगठित कर आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की पहल महिलाओं को आय अर्जित करने, कौशल विकसित करने और सामाजिक सम्मान प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध करा रही है। वहीं, आंगनवाड़ी व्यवस्था के माध्यम से अनुपूरक पोषण की आपूर्ति पोषण संबंधी सरकारी प्रयासों को भी मजबूती देती है।
स्थानीय भागीदारी से ग्रामीण विकास को नई रफ्तार
टीएचआर उत्पादन इकाइयों की उपलब्धियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि जब सरकारी योजनाओं को स्थानीय जरूरतों और महिला समूहों की भागीदारी से जोड़ा जाता है, तो जनकल्याण के साथ रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के लक्ष्य भी मजबूत होते हैं। यह प्रयास आत्मनिर्भर गांवों और सशक्त उत्तर प्रदेश के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
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