उत्तर प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़कर 205 हुई। योगी सरकार के संरक्षण प्रयासों और 'बाघ मित्र' पहल से मानव-वन्यजीव संघर्ष में आई कमी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय पशु बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि जारी है। 2018 में हुई गणना में यूपी में जहां 173 बाघ थे, वहीं 2022 में बढ़कर यह संख्या 205 हो गई। योगी सरकार बाघों के संरक्षण, संवर्धन के लिए अनेक प्रयास कर रही है। यही नहीं, बाघों के लिए गुणवत्तापूर्ण ढंग से प्रबंधन भी किया जा रहा है। वहीं मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने में 'बाघ मित्र' भी बड़ी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यूपी के इस प्रयास की सराहना कर चुके हैं। पीलीभीत, दुधवा, अमानगढ़ व रानीपुर टाइगर रिजर्व में भी बाघ संरक्षण को लेकर अनेक कार्य किए जा रहे हैं।
यूपी में बढ़ी बाघों की संख्या, 2022 की गणना के मुताबिक हुए 205 बाघ
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है। देश में वर्तमान में 58 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश का रानीपुर टाइगर रिजर्व (आरटीआर) 53वां टाइगर रिजर्व है। उत्तर प्रदेश में अब चार टाइगर रिजर्व हैं, जो राज्य की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। 2022 में हुई गणना के मुताबिक यूपी में कुल 205 बाघ हैं। उन्होंने बताया कि 2006 में बाघों की गणना में यूपी में 109, 2010 में 118, 2014 में 117, 2018 में 173 व 2022 में 205 पाए गए थे।
2019 में शुरू हुआ था 'बाघ मित्र' कार्यक्रम, 2023 में सीएम योगी ने की एप की लांचिंग
पहले आए दिन मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं होती थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में 2019 में पीलीभीत में 'बाघ मित्र' कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था। इसका उद्देश्य अप्रिय घटनाओं पर अंकुश लगाना था। यह कार्यक्रम काफी प्रभावी रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ‘मन की बात’ में इसकी तारीफ कर चुके हैं। अक्टूबर 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत में 'बाघ मित्र' एप की लॉचिंग भी की।
पीलीभीत में अब तक जुड़े 120 'बाघ मित्र'
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि पीलीभीत में बाघ मित्रों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। इसमें आसपास के गांवों के रहने वाले 120 लोग 'बाघ मित्र' के रूप में जुड़े हैं। इसमें 118 महिला व दो महिलाओं समेत युवा, बुजुर्ग भी शामिल हैं। बाघ मित्र की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। सिंह ने बताया कि जंगल के समीप के पांच किमी. दूर के गांवों के ग्रामीणों को 'बाघ मित्र' बनाकर उन्हें वन विभाग की तरफ से प्रशिक्षण दिया गया। जंगल से बाहर बाघ या अन्य जानवर दिखने पर 'बाघ मित्र' तुरंत ग्रुप में लिखकर और फोन कर विभाग को भी जानकारी देते हैं। इससे विभाग के अधिकारी व कर्मचारी तत्काल अलर्ट हो जाते हैं और टीम को रवाना कर देते हैं। इसके जरिए समय रहते टीम एक्शन में आ जाती है।
उन्होनों आगे कहा कि बाघ मित्र एप में जानवर की फोटो खींचकर ग्रामीण अपडेट कर सकते हैं। कई बार वे जानवर की सही पहचान नहीं कर पाते थे। इससे दिक्कत होती थी। फोटो अपडेट होने पर विभागीय लोग जानवर को पहचान लेते हैं। इससे लोकेशन भी मिल जाती है कि जंगल से बाघ की दूरी कितनी है। यदि बाघ खेत के पास है तो पहले मॉनीटरिंग टीम भेजते हैं। बाघ मित्र कार्यक्रम निरंतर चलाकर लोगों को सजग, सुरक्षित रखते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर रानीपुर टाइगर रिजर्व में होगा मुख्य कार्यक्रम
योगी सरकार के निर्देश पर अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर 29 जुलाई को अनेक आयोजन भी किए जाएंगे। इसका मुख्य आयोजन रानीपुर टाइगर रिजर्व के तत्वावधान में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, कर्वी चित्रकूट में होगा। इसकी थीम Securing the future of Tigers with indigenous Peoples and Local Communities at the Heart रखी गई है। कार्यक्रम का शुभारंभ वन राज्यमंत्री केपी मलिक करेंगे।
जागरूकता, प्रतियोगिताएं और वन्यजीव संरक्षण पर रहेगा फोकस
रानीपुर टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक डॉ. मनोज कुमार शुक्ल ने बताया कि आयोजन के अंतर्गत जनजागरूकता कार्यक्रम, विद्यालयों में चित्रकला, पेंटिंग, निबंध, टीशर्ट पेंटिंग, क्विज, वाद-विवाद आदि प्रतियोगिताएं होंगी। यहां रानीपुर टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण व लोगो का अनावरण होगा। साथ ही राज्यस्तरीय वन्यजीव फोटोग्राफी प्रतियोगिता व छायाचित्र प्रदर्शनी लगेगी। नेचर गाइड्स आदि का सम्मान, विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
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