निजी एंबुलेंस चालकों का कहना है कि जिला अस्पताल परिसर में उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया जाता। उनका आरोप है कि जब भी वे मरीजों को लेने अस्पताल पहुंचते हैं, प्रशासन पुलिस बुलाकर उन्हें थाने भेज देता है।
मुरैना ( मध्य प्रदेश ) । जिला अस्पताल में निजी एंबुलेंस संचालकों और सिविल सर्जन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। निजी एंबुलेंस चालकों ने सिविल सर्जन डॉ. गजेंद्र सिंह तोमर पर एंबुलेंस संचालन में बाधा पहुंचाने और पुलिस के जरिए प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। वहीं, सिविल सर्जन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कुछ निजी एंबुलेंस चालकों की गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अस्पताल में नहीं घुसने देने का आरोप
निजी एंबुलेंस चालकों का कहना है कि जिला अस्पताल परिसर में उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया जाता। उनका आरोप है कि जब भी वे मरीजों को लेने अस्पताल पहुंचते हैं, अस्पताल प्रशासन पुलिस बुलाकर उन्हें थाने भेज देता है। चालकों के मुताबिक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, लेकिन थाने के चक्कर लगाने में उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई बार घंटों तक थाने में बैठाए रखने के कारण उन्हें दो से पांच हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ता है, जिससे उनके परिवार की आजीविका प्रभावित हो रही है। एंबुलेंस चालकों ने प्रशासन से निष्पक्ष व्यवस्था लागू करने और उन्हें बिना उत्पीड़न के काम करने की मांग की है।
कुछ एंबुलेंस संचालकों की गतिविधियां संदिग्ध हैं
वहीं, सिविल सर्जन डॉ. गजेंद्र सिंह तोमर ने निजी एंबुलेंस चालकों के आरोपों का खंडन करते हुए दो वीडियो जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में लंबे समय से कुछ निजी एंबुलेंस संचालकों की गतिविधियां संदिग्ध रही हैं। उनके अनुसार कुछ चालक निजी नर्सिंग होमों से सांठगांठ कर मरीजों को कमीशन के आधार पर अस्पताल से बाहर ले जाने का काम करते हैं। डॉ. तोमर ने दावा किया कि पूर्व में मरीजों को लेकर विवाद के दौरान अस्पताल परिसर में दो एंबुलेंस चालकों के बीच गोलीबारी जैसी गंभीर घटना भी हो चुकी है। ऐसे में अस्पताल की सुरक्षा, मरीजों की सुविधा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निजी एंबुलेंसों के प्रवेश पर नियंत्रण किया गया है। सिविल सर्जन ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल परिसर में जुआ, अनावश्यक भीड़, अव्यवस्था और चोरी जैसी घटनाओं में भी कुछ निजी एंबुलेंस चालकों की संलिप्तता सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी मरीज को रेफर किए जाने या आवश्यकता पड़ने पर एंबुलेंस को अस्पताल परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, लेकिन अस्पताल परिसर में अनावश्यक रूप से डेरा जमाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।