संसद परिसर में राम मंदिर से जुड़े सांकेतिक प्रदर्शन के विरोध में वाराणसी में विश्व हिंदू रक्षा परिषद और अन्य संगठनों ने राहुल गांधी व पप्पू यादव का पुतला फूंका।
वाराणसी: संसद भवन परिसर में राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए सांकेतिक प्रदर्शन के विरोध में रविवार को वाराणसी में विश्व हिंदू रक्षा परिषद और अन्य हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। जिला मुख्यालय पर एकत्रित कार्यकर्ताओं ने सांसद पप्पू यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला फूंककर विरोध जताया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने विपक्ष के अन्य नेताओं के खिलाफ भी नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन से सनातन परंपरा, संत समाज और भगवा वस्त्र का अपमान हुआ है।
लोकतांत्रिक संस्थानों में सभी को है विरोध दर्ज कराने का अधिकारी
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने पप्पू यादव और राहुल गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बाद में पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थानों में विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन धार्मिक प्रतीकों और आस्था से जुड़े विषयों का राजनीतिक प्रदर्शन में इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं हुई आहत
विश्व हिंदू रक्षा परिषद के संगठन मंत्री राजेश मौर्य ने कहा कि संसद में जिस प्रकार का सांकेतिक प्रदर्शन किया गया, उससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और लोकसभा अध्यक्ष से मांग की कि मामले का संज्ञान लेते हुए सांसद पप्पू यादव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उनकी संसद सदस्यता समाप्त करने पर विचार किया जाए। इसके साथ ही राहुल गांधी और प्रदर्शन में शामिल अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
पुजारी के वेश में पहुंचे पप्पू यादव
दरअसल, संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर से जुड़े चंदा चोरी के मुद्दे को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर पुजारी के वेश में दानपात्र लेकर पहुंचे थे। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रतीकात्मक रूप से दानपात्र में चंदा डाला था। इसके बाद सांकेतिक रूप से चोरी पकड़े जाने का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें पप्पू यादव की प्रतीकात्मक पिटाई भी दिखाई गई। इस प्रदर्शन के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया और कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
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