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विक्रम अवॉर्ड 2023 पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

‘विक्रम अवॉर्ड 2023’ के आयोजन पर हाई कोर्ट की रोक

जबलपुर: मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में आयोजित होने वाले साहसिक खेलों के विक्रम अवॉर्ड–2023 पर अंतरिम रोक लगा दी है।

‘विक्रम अवॉर्ड 2023’ के आयोजन पर हाई कोर्ट की रोक

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट |

जबलपुर: मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में आयोजित होने वाले साहसिक खेलों के विक्रम अवॉर्ड–2023 पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जब तक मामले पर अगला निर्णय नहीं हो जाता, तब तक इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा।
याचिकाकर्ता मेधा परमार ने आरोप लगाया कि खेल विभाग द्वारा चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई और पात्रता मानकों को नज़रअंदाज़ किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ खिलाड़ियों को उचित आधार के बिना अवॉर्ड सूची में शामिल किया गया है, जबकि कई योग्य खिलाड़ी अनदेखे रह गए।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विवेक कृष्ण तिवारी ने वीडियो और दस्तावेज़ों के जरिए चयन प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं को कोर्ट के सामने रखा।

सरकार ने क्या कहा- 

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अजय जैन ने बताया कि वर्ष 2023 के लिए साहसिक खेलों के विक्रम अवॉर्ड की घोषणा की जा चुकी है और पूरी प्रक्रिया नियमानुसार की गई है। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय आने तक पुरस्कार वितरण रोकना आवश्यक हो सकता है, लेकिन सरकार का दावा है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह सही है।

अब सुनवाई 5 जनवरी को- 

जस्टिस विशाल ढलिया की बेंच ने मामले को गंभीर माना और सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 को होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि पुरस्कार वितरण आगे बढ़ेगा या नहीं।

क्या है मामला - 

मेधा परमार ने दावा किया है कि 2019 में अंतरराष्ट्रीय पर्वत चढ़ाई प्रतियोगिता में भारत के शीर्ष 10 पर्वतारोहियों में उनका नाम शामिल था और उन्हें मान्यता मिलनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया, जिसके कारण यह विवाद सामने आया है।

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