पंजाब के फाजिल्का और हरियाणा के अंबाला में भारी बारिश और जलभराव से अनाज मंडियों में रखा धान भीगकर खराब हो गया।
फाजिल्का: भारी बारिश के कारण पंजाब और हरियाणा के अनाज बाजारों में भीषण जलभराव हो गया है, जिससे लाखों क्विंटल भंडारित धान को भारी नुकसान पहुंचा है। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों में अनाज की बोरियों की कतारें बारिश के पानी में डूबी हुई दिखाई दे रही हैं, जिससे स्थानीय किसानों में आक्रोश फैल गया है। फाजिल्का में हाल ही में हुई बारिश के बाद अनाज बाजार जलमग्न हो गया, जिससे बड़ी मात्रा में कटा हुआ अनाज भीग कर क्षतिग्रस्त हो गया। किसानों ने जल निकासी व्यवस्था की कमी को इस विनाश का मुख्य कारण बताया।
बारिश और जलभराव से धान की फसल बर्बाद
एएनआई से बात करते हुए, बाढ़ से प्रभावित एक किसान नरेश कुमार ने बार-बार होने वाली इस समस्या पर गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं है, जिससे हमें बहुत नुकसान हुआ है। इनमें से कई बोरियां मेरी हैं। आप अभी की स्थिति देख सकते हैं। यहां हमेशा बारिश होती है और हमेशा पानी भर जाता है। अगर पानी निकल जाता है तो हालात इतने खराब नहीं होते। छह महीने की मेहनत बर्बाद होने पर दुख जताते हुए नरेश कुमार ने कहा, हमें भारी नुकसान हुआ है। हमनें छह महीने तक फसल उगाई और ये नतीजा निकला। अब सब कुछ व्यर्थ हो गया है। अनाज मंडी में यही हाल है। हरियाणा के अंबाला में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली, जहां बारिश के पानी से स्थानीय अनाज मंडी में बाढ़ आ गई और धान की बोरियों के ढेर डूब गए। क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि यह नुकसान अधिकारियों की लापरवाही और उचित जल निकासी एवं भंडारण सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने में अधिकारियों की विफलता का सीधा परिणाम है।
अंबाला और फाजिल्का में बारिश का अलर्ट
इस क्षेत्र के लिए इस सप्ताह का मौसम पूर्वानुमान गंभीर बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अंबाला में 15 अक्टूबर तक लगातार बारिश, गरज और तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की आशंका है। आईएमडी ने क्षेत्र के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका अर्थ है कि खराब मौसम की स्थिति बनी रहेगी, जिससे पहले से ही गीले धान के भंडार को और भी खतरा हो सकता है। इसी तरह फाजिल्का में भी अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने और हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की आशंका है, जिससे किसानों द्वारा अपनी फसल को सुखाने और फसलों को हो रहे नुकसान को कम करने के प्रयासों में बाधा आ सकती है।
(इनपुट: ANI)
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