भोपाल। चीता प्रोजेक्ट की अपार सफलता के बाद, मध्य प्रदेश सरकार अब एक और बड़े वन्यजीव संरक्षण मिशन...
भोपाल। चीता प्रोजेक्ट की अपार सफलता के बाद, मध्य प्रदेश सरकार अब एक और बड़े वन्यजीव संरक्षण मिशन पर काम कर रही है। राज्य में 45 साल के लंबे अंतराल के बाद 'वाइल्ड बफेलो' (जंगली भैंसों) की वापसी हो रही है।
इस ऐतिहासिक परियोजना के तहत असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से पहली खेप कान्हा नेशनल पार्क पहुँच चुकी है। आज मुख्यमंत्री मोहन यादव इन भैंसों को कान्हा के जंगलों में रिलीज करेंगे।इस परियोजना के तहत असम से कुल 50 जंगली भैंसों को मध्य प्रदेश लाया जाएगा।
पहली खेप काजीरंगा टाइगर रिजर्व में पहुंचा
काजीरंगा टाइगर रिजर्व से 4 जंगली भैंसों (3 मादा और 1 नर) का पहला जत्था 25 अप्रैल को कान्हा पहुंच गया है। 2000 किलोमीटर की लंबी यात्रा के बाद इन्हें कान्हा के विशेष बाड़े में क्वारंटीन में रखा गया था, जहाँ स्वास्थ्य परीक्षण के बाद अब इन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा।
वैज्ञानिकों ने इसे पुनर्वास के लिए उपयुक्त माना
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और कान्हा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने गहन अध्ययन के बाद कान्हा को इन भैंसों के पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना है।
इसलिए यह पहल महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगली भैंसे घास के मैदानों के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हें 'लॉन मूवर्स' कहा जाता है, जो घास को छोटा रखकर पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मध्य प्रदेश पहले से ही 'टाइगर स्टेट' और 'लेपर्ड स्टेट' के रूप में प्रसिद्ध है। जंगली भैंसों के आने से यहाँ के वन्यजीव पर्यटन को नई पहचान और मजबूती मिलेगी।कान्हा नेशनल पार्क का वातावरण इन भैंसों के रहने के लिए सबसे अनुकूल माना गया है, जहाँ न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप है।यह पहल न केवल मध्य प्रदेश की जैव-विविधता को समृद्ध करेगी, बल्कि राज्य की वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और मील का पत्थर साबित होगी।
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