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अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने के लिए बनाएंगे व्यवस्था : सीएम योगी

गोरखपुर में सीएम योगी ने अधिवक्ताओं को कैशलेस इलाज, 5 लाख तक की कल्याण निधि और समयबद्ध न्याय पर बड़ा आश्वासन दिया है। पढ़ें पूरी खबर।

अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने के लिए बनाएंगे व्यवस्था  सीएम योगी

File Photo |

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ताओं को बड़ा आश्वासन देते हुए कहा कि वह, अधिवक्ताओं को कैशलेस इलाज की सुविधा देने के लिए एक व्यवस्था बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं को देश और समाज का सजग प्रहरी बताते हुए आह्वान किया कि वे देश और समाज के खिलाफ होने वाली साजिशों का प्रतिकार करने के लिए चौकन्ना रहें। सीएम योगी मंगलवार को बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट गोरखपुर की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के परिचय समारोह को संबोधित कर रहे थे।

लोकतंत्र और न्यायपालिका के बीच सेतु हैं अधिवक्ता

उन्होंने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को बधाई दी और आजादी के आंदोलन से लेकर वर्तमान कालखंड में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। सीएम योगी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका ने एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए और लक्ष्मण रेखा के भीतर संविधान के प्रति निष्ठा से कार्य करते हुए सामान्य नागरिक को लाभान्वित किया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और अन्य स्तम्भों के बीच संवाद को बढ़ाने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अधिवक्ता, न्यायपालिका तक नागरिकों की बात पहुंचाने और समाधान निकालने के साथ नागरिक और न्यायपालिका के बीच विश्वास का संबंध बनाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता सिर्फ मुकदमा ही नहीं लड़ते बल्कि नागरिकों के विश्वास के भी प्रतीक होते हैं। वह समाज के विधिक सलाहकार और संविधान के सारथी की भूमिका में होते हैं।  

गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से सर्वसुलभ न्याय से स्थापित होता है विधि का शासन

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधि का शासन तभी स्थापित होता है जब न्याय गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से सर्वसुलभ होता है। गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और सर्वसुलभ न्याय के सबसे बड़े वाहक अधिवक्ता ही होते हैं। उन्होंने कहा कि समयबद्ध तरीके से न्याय सर्वसुलभ कराने के लिए देश में जो तीन नए कानून आए, उन्हें सफलतापूर्वक लागू कराने में सबसे बड़ा योगदान अधिवक्ताओं ने दिया है। 

भारत के प्रति बढ़े आकर्षण को स्वीकार करने को तैयार नहीं कई ताकतें

सीएम योगी ने कहा कि बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी दुनिया में भारत के प्रति जो आकर्षण बढ़ा है उसे कई ताकतें स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत बॉटम फाइव से टॉप फाइव देशों में आ चुका है। अब टॉप थ्री में आने को तत्पर है। भारत की इस प्रगति यात्रा को रोकने के लिए अनेक षड्यंत्र किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर और फेक एकाउंट्स के जरिये जातीय समूहों को आपस में लड़ाने, क्षेत्र, मत, भाषा के आधार पर समाज को विभाजित करने का प्रयास किया जाएगा। साजिशन न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका पर अंगुली उठाने की कोशिश की जाएगी। ऐसे में अधिवक्ताओं की बड़ी भूमिका होने वाली है, उन्हें देश और समाज के प्रति होने वाली साजिशों के विरुद्ध खुद को तैयार रखना होगा।

अधिवक्ता कल्याण निधि को बढ़ाकर किया पांच लाख रुपये

मुख्यमंत्री ने अधिवक्ता हित में अपनी सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि पहले डेढ़ लाख रुपये थी, उसे उन्होंने बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया। इसके लिए पांच सौ करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया है। इससे चार हजार अधिवक्ताओं को अब तक 200 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है। उन्होंने बताया कि आर्थिक सहायता देने के लिए अधिवक्ताओं की उम्र सीमा को बढ़ाकर 70 वर्ष किया गया। न्याय मित्र सहित न्यायालयों में सरकार की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की फीस बढ़ाने, नए न्यायालय भवन, अधिवक्ताओं के लिए चैंबर बनाने का कार्य भी सरकार ने किया। 

पुस्तकों और पत्रिकाओं के क्रय के लिए जारी की 1.60 करोड़ रुपये की धनराशि

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने अधिवक्ता सामाजिक सुरक्षा निधि से 87 करोड़ 86 लाख रुपये का भुगतान करने के साथ पुस्तकों और पत्रिकाओं के क्रय के लिए भी 1 करोड़ 60 लाख रुपये की धनराशि जारी की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के पहले 10 ऐसे जिले थे जहां कोर्ट ही नहीं थे। वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए 3000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए और उनके कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के मॉडल से अभिभूत देश के मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि यह मॉडल पूरे देश में लागू होना चाहिए। उन्होंने बताया कि 600 करोड़ रुपये की लागत से इलाहाबाद हाईकोर्ट में 10000 की क्षमता वाले और 2000 से अधिक अधिवक्ताओं के चैंबर वाले भवन का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

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