पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दो अति वरिष्ठ नेताओं-जनरल झांग यूक्सिया और लीयू झेनली की गिरफ्तारी के मुद्दा की अनुगूज अब भी सुनाई पड़ रही है।
हॉन्गकॉन्ग। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दो अति वरिष्ठ नेताओं-जनरल झांग यूक्सिया और लीयू झेनली की गिरफ्तारी के मुद्दा की अनुगूज अब भी सुनाई पड़ रही है। वहां जोरशोर से चीनी सेना की कार्रवाई की क्षमता और क्या झी ताइवान पर हमला करने का दुस्साहस कर सकते हैं, जोरदार बहस हो रही है।
जनरल झांग यूक्सिया की हिरासत, सेना के शीर्ष ढांचे पर असर
पीएलए के दोनों दिग्गजों को हिरासत में लेने की घोषणा 24 जनवरी को हुई थी। इनमें झांग सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के चेयरमैन थे। उन्हें अगले साल रिटायर होना था। वास्तव में झांग को नरमपंथी होने की वजह से आदर्श के रूप में नहीं माना जा सकता क्योंकि पीएलए के शीर्ष पद पर पहुंचने वाला कोई भी व्यक्ति 'अच्छा' नहीं हो सकता है।
शी जिनपिंग की रणनीति पर सवाल
दूसरी तरफ, लीयू ज्वाइंट स्टाफ विभाग के चीफ स्टाफ थे। साथ में वे सीएमसी के सदस्य भी थे। सीएमसी के सिर्फ दो सदस्यों को ही हटाने पर झी के इरादों पर सवाल उठ रहे हैं, जैसे- खाली पदों को भरने के लिए पीएलए के अन्य नेताओं को प्रोन्नत करेंगे या पूरी सीएमसी को भंग कर पीएलओ को खुद संचालित करेंगे। तथ्य तो यह बताते हैं कि हैं कि झी हटाए गए सदस्यों से खाली सीटों को तुरंत नहीं भरेंगे। देखा जाए तो तो यह माओ युग के समय से लेकर अभी तक का सबसे छोटा सीएमसी है। झी सुनियोजित तरीके से पीएलए के पेशेवर नेतृत्व को खोखला कर रहे हैं।
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