काला सागर के पास यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद भारतीय चालक दल वाले लाइबेरिया-पंजीकृत तेल टैंकर में आग लग गई।
मॉस्को: रूसी परिवहन मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद काला सागर तट पर लाइबेरिया में पंजीकृत एक तेल टैंकर में आग लग गई, जिसमें पूरी तरह से भारतीय चालक दल सवार थे। मंत्रालय के अनुसार, जहाज को "नौसैनिक ड्रोन" द्वारा निशाना बनाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप काला सागर में कच्चे तेल में आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि आपातकालीन बचाव दल शुरू में लपटों को बुझाने में असमर्थ रहे। रूसी परिवहन मंत्रालय ने कहा कि आग की तीव्रता कम होने पर दमकलकर्मी आग बुझाने का प्रयास करेंगे। मंत्रालय ने पुष्टि की कि हमले के बाद चालक दल के सभी 23 सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया। यह घटना सोची के पास घटी, जो लगभग 500,000 की आबादी वाला एक प्रमुख रूसी काला सागर रिसॉर्ट स्थल है।
घायल भारतीय चालक दल को मिली चिकित्सा सहायता
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए फुटेज में पानी के ऊपर तेज नारंगी लपटें उठती हुई दिखाई दे रही हैं। साथ ही सोची के पास काले धुएं का घना गुबार उठता हुआ भी दिख रहा है। यह टैंकर हमला रोमानियाई तट के पास एक अन्य वाणिज्यिक जहाज, एमवी रॉयड मम्माडोव के जलने और डूबने के एक दिन बाद हुआ, जिसमें दो विदेशी नागरिकों की मौत हो गई और तीन भारतीय नागरिकों सहित चालक दल के सदस्य घायल हो गए। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने हमले की निंदा की और चल रहे संघर्षों को समाप्त करने के लिए संवाद और कूटनीति के अपने आह्वान को दोहराया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की कि घायल चालक दल के सदस्यों को रोमानियाई अधिकारियों द्वारा बचा लिया गया है और उन्हें चिकित्सा सहायता दी जा रही है, साथ ही बुखारेस्ट की त्वरित कार्रवाई के लिए आभार व्यक्त किया। रोमानिया में भारतीय राजदूत मनोज मोहपात्रा ने भी कॉन्स्टैंटा काउंटी अस्पताल में इलाज करा रहे तीन भारतीय नागरिकों से मुलाकात की और उन्हें निरंतर सहायता का आश्वासन दिया।
वैश्विक व्यापार पर खतरे को लेकर जताई चिंता
विदेश मंत्रालय ने वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार बढ़ते खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि इस तरह के हमले वैश्विक व्यापार और दुनिया भर के लोगों के कल्याण को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही संयुक्त राष्ट्र में जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर मित्र समूह के सह-प्रायोजन में भारत की भूमिका पर प्रकाश डाला। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान भी वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत के बाद से काला सागर में वाणिज्यिक समुद्री यातायात पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं और दोनों सरकारें बार-बार जहाजों और समुद्री बुनियादी ढांचे को निशाना बना रही हैं। हाल के दिनों में मॉस्को ने यूरोपीय संघ के सदस्य देश रोमानिया के पास यूक्रेनी कृषि उत्पादों को ले जा रहे अनाज वाहकों पर हमला किया है।
काला सागर में बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता
दूसरी ओर कीव का कहना है कि रूसी पेट्रोलियम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना यूक्रेनी शहरी केंद्रों पर रात में होने वाली हवाई बमबारी का एक वैध जवाब है। हाल के हफ्तों में दोनों युद्धरत पक्षों ने अपने सैन्य अभियानों को तेज करने का संकल्प लिया है, जिससे काला सागर में चलने वाले वाणिज्यिक जहाजों की समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके अलावा मॉस्को ने कीव में महत्वपूर्ण पुलों पर हमले तेज कर दिए हैं और राजधानी को निशाना बनाकर दिन के समय ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे एक नई रणनीति अपनाई गई है जिसके कारण भारी व्यवधान और यातायात जाम हो गया है। हाल ही में हुई टैंकर में आग की घटना ने शत्रुता के जारी रहने के कारण वाणिज्यिक जहाजों के सामने मौजूद लगातार खतरों को और उजागर कर दिया है।
(इनपुट: ANI)
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