ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल मचने के कारण पाकिस्तान का विमानन उद्योग वित्तीय संकट से जूझ रहा है।
कराची (पाकिस्तान)। ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल मचने के कारण पाकिस्तान का विमानन उद्योग वित्तीय संकट से जूझ रहा है। मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों में आई वृद्धि से देश भर में वाणिज्यिक उड़ान संचालन और पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी वैश्विक चिंता
28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद ईरान द्वारा कथित तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिए जाने से संकट और गहरा गया। यह रणनीतिक जलमार्ग वैश्विक तेल पारगमन का एक प्रमुख मार्ग है और इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्यवधान ने वैश्विक ईंधन बाजारों में व्यापक अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसमें विमानन उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
जेट फ्यूल और एविएशन गैसोलीन की कीमतों में तेज उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि वाणिज्यिक विमानों द्वारा उपयोग किए जाने वाले जेट ए-1 ईंधन की कीमत में लगभग 154 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसी बीच, छोटे प्रशिक्षण विमानों के लिए आवश्यक विमानन गैसोलीन की कीमत में लगभग 80 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। ईंधन की कीमतों में अचानक हुई इस वृद्धि के कारण एयरलाइंस को बढ़ते परिचालन खर्चों की भरपाई के लिए टिकटों की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं।
महंगे टिकट और बढ़ता वित्तीय दबाव एयरलाइंस पर भारी
घरेलू हवाई किराए में लगभग 10 हजार से 15 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय टिकटों की कीमतों में भारी उछाल आया है। ये कीमतें रूट और यात्रा की मांग के आधार पर 30 हाजर से 1.50 लाख रुपये के बीच हैं। पाकिस्तान में काम करने वाली एयरलाइंस वित्तीय बोझ को उठाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। उद्योग के जानकारों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संकट जारी रहता है तो कीमतों में और बढ़ोतरी होना अपरिहार्य हो सकता है।
उड़ानें रद्द, पायलट ट्रेनिंग भी संकट में
अस्थिरता के कारण उड़ानों का शेड्यूल भी बिगड़ गया है। पिछले 17 दिनों में, क्षेत्रीय हालात में उतार-चढ़ाव के चलते कराची और अन्य हवाई अड्डों से खाड़ी देशों और उससे आगे जाने वाली 1,600 से ज़्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। पायलट ट्रेनिंग संस्थानों को और भी गहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है। एविएशन गैसोलीन—जो ट्रेनिंग विमानों को ऊर्जा देता है—दुनिया भर में केवल कुछ ही जगहों पर बनाया जाता है, और इसे 16,000 से 24,000 लीटर की खेप में या फिर 200-लीटर वाले ड्रमों में आयात करना पड़ता है।
बढ़ती लागत से फ्लाइंग स्कूलों के सामने अस्तित्व का खतरा
इस ईंधन की कीमत अब बढ़कर लगभग 670 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जिससे फ्लाइंग स्कूलों के सामने गंभीर चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। कराची हवाई अड्डे पर मौजूद प्रशिक्षण केंद्रों की रिपोर्ट के अनुसार, पायलट प्रशिक्षण की लागत में लगभग 10 लाख रुपये की वृद्धि हुई है, और उम्मीद है कि ईंधन का मौजूदा भंडार केवल एक महीने तक ही चल पाएगा। एविएशन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो छोटे विमानों का संचालन और पायलट प्रशिक्षण गतिविधियां जल्द ही ठप पड़ सकती हैं, जिससे पाकिस्तान का पहले से ही नाज़ुक एविएशन संकट और गहरा जाएगा।
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