भारत और इंडोनेशिया ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
जकार्ता। भारत और इंडोनेशिया ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने मंगलवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
द्विपक्षीय संबंधों को मिला नया आयाम
संयुक्त बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की 6 से 8 जुलाई तक की राजकीय यात्रा जनवरी 2025 में राष्ट्रपति प्रबोवो की भारत यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। दोनों नेताओं ने नियमित शिखर बैठकें जारी रखने और मौजूदा संवाद तंत्र को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में नियमित संवाद, संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा अनुसंधान, नई रक्षा तकनीकों के सह-उत्पादन, रक्षा उद्योग सहयोग और सूचना साझा करने को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और वायु से वायु मिसाइल सहयोग को भी दोनों देशों ने महत्वपूर्ण कदम बताया। समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा, मानवीय सहायता, आपदा राहत, प्रदूषण नियंत्रण तथा खोज एवं बचाव अभियानों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया। साथ ही समुद्री सुरक्षा संबंधी समझौता ज्ञापनों के नवीनीकरण का भी स्वागत किया गया।
आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख
भारत और इंडोनेशिया ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा करते हुए इसके खिलाफ निर्णायक वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित आतंकी सूची में शामिल आतंकियों और संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थन किया तथा आतंक वित्तपोषण, साइबर सुरक्षा और संगठित अपराध से निपटने में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश को द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख आधार बताते हुए आसियान-भारत व्यापार समझौते की समीक्षा जल्द पूरी करने पर जोर दिया। वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था, महत्वपूर्ण खनिजों और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
खनिज, ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग
दोनों देशों ने खनिज एवं इस्पात क्षेत्र में हुए समझौतों का स्वागत किया। इसके तहत स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और पीटी क्राकाटाऊ स्टील के बीच इंडोनेशिया में स्टेनलेस स्टील स्लैब निर्माण सुविधा स्थापित करने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, उर्वरक, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, एलएनजी और जैव ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
डिजिटल और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा
दोनों देशों ने समुद्री और हवाई संपर्क बेहतर बनाने, सबांग बंदरगाह के विकास में साझेदारी और डिजिटल कॉमर्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। सीमा पार क्यूआर भुगतान प्रणाली और दूरसंचार तकनीकों पर भी सहयोग को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। भारत और इंडोनेशिया ने इसरो और इंडोनेशिया की राष्ट्रीय अनुसंधान एवं नवाचार एजेंसी के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। गगनयान मिशन, उपग्रह प्रक्षेपण और इंडोनेशिया में प्रस्तावित स्पेसपोर्ट परियोजना में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंध होंगे मजबूत
दोनों नेताओं ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रंबानन मंदिर परिसर के भारत समर्थित जीर्णोद्धार कार्य का उद्घाटन किया। साथ ही वर्ष 2026-27 को रवींद्रनाथ टैगोर और की हजर देवांतारा की स्मृति में "भारत-इंडोनेशिया सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति का टैगोर-देवांतारा वर्ष" के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु के परिसर की स्थापना और अकादमिक साझेदारी को भी बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण
दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, वैश्विक दक्षिण की मजबूत आवाज और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन को दोहराया। इंडोनेशिया ने 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन किया, जबकि भारत ने ब्रिक्स में इंडोनेशिया की सक्रिय भूमिका का स्वागत किया।
प्रवासी भारतीयों ने जताई खुशी
जकार्ता में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में भारतीय प्रवासी समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का स्वागत किया। प्रवासी भारतीयों ने कहा कि इन समझौतों से भारत और इंडोनेशिया के संबंध और मजबूत होंगे। वहीं युवा प्रतिभागियों ने दोनों नेताओं के संबोधनों की सराहना करते हुए इसे ऐतिहासिक अवसर बताया।
(एएनआई)
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