अगर तेल के दाम लगातार बढ़ते रहे और मध्य पूर्व का संकट जारी रहा तो लड़खड़ा रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में एकबार फिर मुद्रास्फीति दो अंकों की बनी रहेगी।
कराची (पाकिस्तान)। अगर तेल के दाम लगातार बढ़ते रहे और मध्य पूर्व का संकट जारी रहा तो लड़खड़ा रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में एकबार फिर मुद्रास्फीति दो अंकों की बनी रहेगी। प्रमुख अंग्रेजी दैनिक 'डॉन' ने यह रिपोर्ट दी है।
बाहरी मोर्चे पर बढ़ता असहनीय दबाव
विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि आसमान छूतीं कीमतें और आयात में बाधा से पाकिस्तान की संवेदनशील बाहरी स्थिति पहले से ही असहनीय तनाव झेल रही है। 'टॉप लाइन सेक्यूरिटीज लि.' ने अपनी ताजा रिपोर्ट-'पाकिस्तान की रणनीति' शनिवार को जारी की। इसमें इस बात का गंभीर विश्लेषण किया गया है कि कैसे ऊर्जा की लागत बढ़ रही है और क्षेत्रीय अस्थिरता कैसे पाकिस्तान की अस्थिर शेयर बाजार पर चोट कर रही है।
तेल 100 डॉलर पार होने पर महंगाई और बढ़ने की चेतावनी
ब्रोकरेज फर्म ने इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह स्थिति 'लंबे समय से चली आ रही है और लगातार बदल रही है।' स्थिरता की कोई भी उम्मीद पूरी तरह संघर्ष के तत्काल और शांतिपूर्ण समाधान पर निर्भर करेगी। 'डॉन के हवाले रिपोर्ट में संभावना व्यक्त की गई है कि मौजूदा स्थिति में मुद्रास्फीति अगले वर्ष में 9 से 10 अंक के बीच रह सकती है। वर्ष 2026 के चौथी तिमाही में इसके 11 अंक तक पहुंच जाने की संभावना है। यह आकलन तेल का मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल के आधार पर किया गया है। अगर तेल का मूल्य बढ़ता है तो यह प्रति 10 डॉलर के हिसाब से मुद्रास्फीति पर 50 बेसिस प्वाइंट का बोझ बढ़ेएगी।
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