पाकिस्तान की एक स्थानीय अदालत ने पत्रकार फखरुर रहमान के फिजिकल रिमांड के लिए नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) की अर्जी को खारिज कर दिया।
इस्लामाबाद (पाकिस्तान)। पाकिस्तान की एक स्थानीय अदालत ने पत्रकार फखरुर रहमान के फिजिकल रिमांड के लिए नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) की अर्जी को खारिज कर दिया और इसके बजाय उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने का आदेश दिया है।
पत्रकार पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप
स्थानीय मीडिया 'डॉन' के मुताबिक रहमान को एक दिन पहले प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) के तहत हिरासत में लिया गया था। बीते 20 अप्रैल को दर्ज FIR के मुताबिक एजेंसी ने उन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकारी संस्थानों के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। जिला मजिस्ट्रेट यासिर महमूद के सामने सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील अहद खोखर ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष रहमान की कथित संलिप्तता साबित करने में असफल रहा है।
पत्रकार ने केवल साझा किया था एक बयान
उन्होंने अदालत को बताया कि पत्रकार ने केवल एक धार्मिक विद्वान के बयान को उद्धृत किया था। इसमें उनकी अपनी कोई व्यक्तिगत राय नहीं थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि वही वीडियो कई अन्य लोगों द्वारा भी साझा किया गया था और सवाल उठाया कि मूल वक्ता के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। खोखर ने जांच पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अधिकारियों ने उस मौलवी का बयान दर्ज किया है। उन्होंने यह भी कहा कि रहमान ने 14 अप्रैल को जारी NCCIA के नोटिस का पालन किया था, अपनी बेगुनाही बनाए रखी और जांच में पूरा सहयोग किया।
फोन पहले से एजेंसी के पास, फिर रिमांड की जरूरत क्यों?
फिजिकल रिमांड का विरोध करते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि पत्रकार का फोन पहले ही एजेंसी के पास है और किसी अतिरिक्त बरामदगी की जरूरत नहीं है। ऐसे में उन्हें मामले से मुक्त किया जाए। हालाँकि, अभियोजन पक्ष ने यह तर्क दिया कि भले ही रहमान ने उस पोस्ट को अपना माना है लेकिन उसने अपने फ़ोन का पासवर्ड साझा नहीं किया है इसलिए फोरेंसिक जाँच ज़रूरी है। इसी आधार पर उनकी फिजिकल रिमांड मांगी गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने एजेंसी के मांग को खारिज हुए न्यायिक रिमांड का आदेश दिया।
PECA की धाराओं के तहत भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप
FIR में PECA की धारा 20 और 26-A का ज़िक्र है, जिसमें रहमान और कई अन्य पत्रकारों और टिप्पणीकारों पर जान-बूझकर झूठी बातें फैलाकर अशांति भड़काने और सरकारी संस्थाओं की साख खराब करने का आरोप लगाया गया है। अधिकारियों ने दावा किया कि ऑनलाइन गतिविधियों का एक ऐसा सिलसिला चल रहा है जिसका मकसद सरकारी अधिकारियों का मज़ाक उड़ाना है।
प्रेस की आजादी को लेकर चिंता
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला PECA की बढ़ती आलोचना के बीच सामने आया है, खासकर जनवरी 2025 में इसके विवादास्पद संशोधन के बाद। मीडिया संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इस कानून को लगातार दमनकारी बताया है और चेतावनी दी है कि इसका इस्तेमाल पाकिस्तान में विरोध की आवाज़ दबाने और प्रेस की आज़ादी पर रोक लगाने के लिए किया जा रहा है।
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