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बांग्लादेश में हिंदू युवक की गिरफ्तारी के खिलाफ ढाका में प्रदर्शन, अल्पसंख्यकों ने देशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार हो रहे लक्षित उत्पीड़न और एक हिंदू युवक की विवादित गिरफ्तारी के विरोध में राजधानी ढाका में विशाल प्रदर्शन शुरू हो गया है।

बांग्लादेश में हिंदू युवक की गिरफ्तारी के खिलाफ ढाका में प्रदर्शन अल्पसंख्यकों ने देशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी

Mass Protest in Dhaka Over Arrest of Hindu Youth Haridas Chandra Tarani Das |

ढाका (बांग्लादेश)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार हो रहे लक्षित उत्पीड़न और एक हिंदू युवक की विवादित गिरफ्तारी के विरोध में राजधानी ढाका स्थित नेशनल प्रेस क्लब के सामने विशाल प्रदर्शन शुरू हो गया है। बांग्लादेशी अधिकारियों द्वारा हरिदास चंद्र तरणी दास नाम के एक युवा हिंदू को मनी लॉन्ड्रिंग के मनगढ़ंत आरोपों के तहत गिरफ्तार किए जाने के बाद अल्पसंख्यक समुदायों ने एकजुट होकर इस कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हरिदास चंद्र तरणी दास ने उत्तरी बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी इलाके में भगवान श्रीराम की 81 फीट ऊंची प्रतिमा बनाने की पहल की थी, जिसके बाद पुलिस ने यह विवादित एक्शन लिया है।

कट्टरपंथियों के निशाने पर हिंदू युवक, कोर्ट ने भेजा जेल

'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में शीर्ष अल्पसंख्यक नेताओं ने पुलिस और प्रशासन की इस दमनकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा की गई इस विवादित गिरफ्तारी के बाद स्थानीय अदालत ने हिंदू युवक हरिदास चंद्र तरणी दास को जेल भेज दिया है। इस फैसले से अल्पसंख्यक समूहों में भारी आक्रोश है, जिनका साफ मानना है कि मनी लॉन्ड्रिंग के यह आरोप पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण हैं और इनका एकमात्र उद्देश्य धार्मिक निर्माण कार्य को रोकना है।

गौरतलब है कि पिछले महीने इसी गाइबांधा जिले में एक इस्लामी प्रदर्शन के दौरान भगवान श्रीराम की तस्वीर के कथित अपमान के बाद भी हिंदू अल्पसंख्यकों ने व्यापक प्रदर्शन किए थे, जिसके बाद अब यह नया विवाद सामने आया है।

"हम इस तरह की गिरफ्तारी को स्वीकार नहीं कर सकते" - मनिंद्र कुमार नाथ

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए, 'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' के महासचिव मनिंद्र कुमार नाथ ने हिंदू युवक के खिलाफ सरकारी कार्रवाई की तीखे शब्दों में भर्त्सना की। मनिंद्र कुमार नाथ ने कहा, "आज, बांग्लादेश हिंदू बौद्ध कृष्णलोक तबरिषद (हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद) ने हरिदास चंद्र तरणी दास की गिरफ्तारी के खिलाफ एक प्रदर्शन का आयोजन किया है। हरिदास चंद्र तरणी दास को सरकार ने दो या तीन दिन पहले इस दावे पर गिरफ्तार किया था कि उन्होंने पलाशबाड़ी में एक राम चंद्र देवता, राम चंद्र की मूर्ति बनाई थी। इस मामले में, हम तरणी दास की इस तरह की गिरफ्तारी को स्वीकार नहीं कर सकते।"

अल्पसंख्यक नेता ने देश भर में पिछले दो वर्षों से गैर-मुस्लिम समुदायों को निशाना बनाकर की जा रही प्रणालीगत हिंसा और कानूनी उत्पीड़न को भी उजागर किया। नाथ ने आगे कहा, "आप जानते हैं, पिछले दो वर्षों की शुरुआत से ही बांग्लादेश में विभिन्न प्रकार की गिरफ्तारियां और अत्याचार हुए हैं। इतना ही नहीं, आप जानते हैं कि पिछले साल पूरे बांग्लादेश में 3,000 घटनाएं हुईं। इनमें से 66 लोगों की हत्या कर दी गई और कट्टरपंथियों द्वारा इतने सारे मंदिरों पर हमले किए गए। यह अवांछनीय है। हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते।"

अंतरिम सरकार को अल्टीमेटम: देशव्यापी आंदोलन और हड़ताल की चेतावनी

विरोध मार्च के दौरान 'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' के वरिष्ठ नेता सुब्रत चौधरी ने अंतरिम प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी और धार्मिक सद्भाव को अस्थिर करने की कोशिश करने वाले तत्वों को बेनकाब करने की मांग की। सुब्रत चौधरी ने कहा, "एक सुंदर माहौल बना है, सद्भाव का माहौल स्थापित हुआ है। ऐसे में वे कौन लोग हैं जिन्होंने इस सरकार को शर्मिंदा करने के लिए इस तरह की घटना को अंजाम दिया है? हम सरकार को इसके खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए अल्टीमेटम देना चाहते हैं।"

वरिष्ठ नेता ने जेल में बंद हिंदू युवक की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन के सर्वोच्च स्तर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार अल्पसंख्यक आस्था का अपमान करने वालों के खिलाफ तुरंत उचित कानूनी कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो देश भर में हड़ताल की जाएगी और एक बड़े देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया जाएगा। 

प्रशासनिक साजिश पर सवाल और एकजुट आंदोलन का संकल्प

सुब्रत चौधरी ने स्थानीय हिंदू कार्यकर्ता के खिलाफ अचानक हुई इस पुलिसिया कार्रवाई के पीछे के राजनीतिक और प्रशासनिक इरादों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सवाल किया, "दूसरी तरफ, किसके निर्देश, किसके आदेश और किसके हस्तक्षेप पर ऐसे भक्त को गिरफ्तार किया गया? हम चाहते हैं कि सरकार उन्हें बेनकाब करे। मुझे उम्मीद है कि आप उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगे, चाहे वे कितने भी बड़े प्रशासनिक अधिकारी क्यों न हों।"

एकता परिषद के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि अल्पसंख्यक समुदाय अब अपने धार्मिक अधिकारों को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी के लक्षित उपयोग को और बर्दाश्त नहीं करेगा। चौधरी ने अंत में कहा, "जिस व्यक्ति को जेल में डाला गया है, उसे तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। यदि उसे रिहा नहीं किया गया, तो बांग्लादेश का सनातन (हिंदू) समुदाय, बौद्ध समुदाय और ईसाई समुदाय आने वाले दिनों में सड़कों पर एक संयुक्त आंदोलन खड़ा करेगा।"

राजनयिक स्तर पर गूंज: भारत ने बांग्लादेश को चेताया

इस मामले और बांग्लादेश में बढ़ते अत्याचारों की गूंज अब राजनयिक स्तर पर भी सुनाई दे रही है। भारत ने बीती 23 जून को बांग्लादेश से कड़े शब्दों में आग्रह किया था कि वह कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई शुरू करे और अल्पसंख्यक समुदायों की पूर्ण सुरक्षा की गारंटी दे। नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इन संवेदनशील भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बात करते हुए, भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने धार्मिक स्थलों और प्रतीकों को लगातार निशाना बनाए जाने पर नई दिल्ली की गहरी चिंता व्यक्त की थी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, "हमने बांग्लादेश से हिंदू देवी-देवताओं और उनकी तस्वीरों के अपमान से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्ट देखी है, जिससे विरोध प्रदर्शन शुरू हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश सरकार वहां के चरमपंथियों पर अंकुश लगाएगी और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा की गारंटी देगी।"
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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