Maulana Madani : बांग्लादेश में हुई मॉब लिंचिंग और सांप्रदायिक हिंसा को लेकर जमीयत उलेमा – ए- हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया.
Maulana Madani : बांग्लादेश में हुई मॉब लिंचिंग और सांप्रदायिक हिंसा को लेकर जमीयत उलेमा – ए- हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. उन्होंने इस पोस्ट के जरिए कड़ा विरोध जताया. मौलाना मदनी ने लिखा कि बांग्लादेश में जो कुछ हुआ, वह बहुत ही बुरा हुआ. यह केवल एक हत्या नहीं, बल्कि हैवानियत और दरिंदगी की इंतिहा है. इसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है.
मौलाना अरशद मदनी ने लिखा कि इस्लाम इसकी कतई, कतई अनुमति नहीं देता, जिन लोगों ने ऐसा किया है, उन्होंने न केवल इस्लामी शिक्षाओं का उल्लंघन किया है, बल्कि इस्लाम को बदनाम करने का काम भी किया है. इसलिए ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए. क्रिसमस के मौके पर ईसाई समुदाय के साथ सांप्रदायिक तत्वों ने जो कुछ किया.
उन्होंने लिखा कि उसे भी किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता. यह संविधान में नागरिकों को दी गई धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है. जगह-जगह चर्चों पर हमले हुए और ईसाई समुदाय को अपना त्योहार मनाने से रोकने की कोशिश की गई.
'मॉब लिंचिंग पर चुप्पी, बेहद अफ़सोसनाक'
मौलाना मदनी ने लिखा कि कुछ दिन पहले बिहार के नालंदा में कपड़ों की फेरी लगाने वाले एक मुसलमान से कुछ लोगों ने नाम और धर्म पूछकर इतनी बेरहमी से मारपीट की कि उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया. केरल में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां छत्तीसगढ़ के एक दलित युवक को बांग्लादेशी बताकर मौत के घाट उतार दिया गया. इसके कुछ ही दिनों बाद ओडिशा में पश्चिम बंगाल के तीन मुस्लिम मजदूरों की मॉब लिंचिंग हुई, जिसमें से एक की मौत हो गई और दो लोगों का अस्पताल में इलाज हो रहा है.
उन्होंने लिखा कि बांग्लादेश की घटना पर टीवी चैनलों में चर्चा और देश में हो रही मॉब लिंचिंग पर चुप्पी, बेहद अफसोसनाक है. इस दोहरे रवैये को क्या नाम दिया जाए? यकीनन ये वह भारत नहीं है, जिसका सपना महात्मा गांधी, शेखुल हिंद, मोतीलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद और हमारे बुजुर्गों ने देखा था.
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