साल 2026 की शुरुआत में लैटिन अमेरिका में अमेरिकी वर्चस्व की बातें होने लगीं। शक्ति, तेल, चुनाव और कथित अपराध गतिविधियों को लेकर वर्षों की टकराहट, 3 जनवरी को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में बदल गई।
नई दिल्ली। साल 2026 की शुरुआत में लैटिन अमेरिका में अमेरिकी वर्चस्व की बातें होने लगीं। शक्ति, तेल, चुनाव और कथित अपराध गतिविधियों को लेकर वर्षों की टकराहट, 3 जनवरी को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में बदल गई, जिसमें वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया गया।
अमेरिकी सैन्य बलों ने वेनेजुएला में एक लक्षित अभियान (ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व) शुरू किया। यह सालों से चले आ रहे आर्थिक प्रतिबंधों के बाद सीधे सैन्य हस्तक्षेप की दिशा में एक बड़ा कदम है। ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि मादुरो ड्रग तस्करी में शामिल थे और उन्होंने 2024 के चुनावों में धांधली की थी। अमेरिका ने इससे पहले वेनेजुएला पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे और मादुरो की गिरफ्तारी के लिए 5 करोड़ डॉलर के इनाम की घोषणा की थी।
संघर्ष के पीछे का असली कारण: तेल का खेल
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, जो 303 अरब बैरल से अधिक है। यह दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 17 प्रतिशत है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों और निवेश की कमी के कारण उत्पादन गिरकर केवल 10 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है। वेनेजुएला का तेल भंडार सऊदी अरब (267 अरब बैरल) से भी अधिक है और अमेरिका के भंडार से छह गुना ज्यादा है। इसका अधिकांश हिस्सा 'ओरिनोको बेल्ट' में स्थित है। यह विशाल संसाधन ही संघर्ष का मुख्य केंद्र है, भले ही इसके पीछे के आधिकारिक कारण कुछ भी बताए जा रहे हों।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और अमेरिकी रुख
अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने अपने 'X' पोस्ट में लिखा कि, "राष्ट्रपति ट्रम्प के पास किसी दूसरे देश पर हमला करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। अमेरिकियों के पास अपनी इनकम से खर्च चलाने के लिए भी मुश्किल हो रही है, तो उन्हें घरेलू संकटों पर ध्यान देना चाहिए, अपनी अवैध सैन्य साहसिकता को समाप्त करना चाहिए और 'बिग ऑयल' के लिए वेनेजुएला को चलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।" वहीं, ट्रम्प ने घोषणा की कि अमेरिका अस्थायी रूप से वेनेजुएला को "चलाएगा" और उसके तेल संसाधनों का उपयोग करेगा। उन्होंने क्षेत्र के अन्य देशों को भी अमेरिकी निर्देशों का पालन करने की चेतावनी दी है।
अमेरिका ने बताए हस्तक्षेप के तीन मुख्य कारण
अमेरिका ने हस्तक्षेप के लिए मुख्य रूप से तीन कारण बताए हैं। इसमें पहला नार्को-आतंकवाद बताया है। मादुरो पर अमेरिका में कोकीन भेजने की साजिश रचने का आरोप है। दूसरा कारण राष्ट्रीय सुरक्षा बताया गया है। अमेरिका का दावा है कि मादुरो सरकार एक "आपराधिक संगठन" बन गई है जो आतंकी समूहों को शरण देती है। वहीं तीसरा कारण प्रवासन संकट को बताया गया है। वेनेजुएला से लाखों लोगों के पलायन को अमेरिका ने अपनी सीमा सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।
इतिहास और भू-राजनीति
वेनेजुएला और अमेरिका के रिश्तों में खटास हुगो चावेज के समय से शुरू हुई थी, जिन्होंने तेल संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया और अमेरिकी प्रभाव का विरोध किया। साल 2013 में चावेज की मृत्यु के बाद मादुरो राष्ट्रपति बने, जिन्हें अमेरिका तानाशाही और भ्रष्टाचार का दोषी मानता है। साल 2019 में जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान भी वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी (PDVSA) की संपत्तियां फ्रीज कर दी गई थीं।
वैश्विक बाजार पर असर
अब ट्रम्प प्रशासन ने उन कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगा दिए हैं जो वेनेजुएला के तेल क्षेत्र से जुड़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले का वैश्विक तेल कीमतों पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वेनेजुएला का उत्पादन फिलहाल वैश्विक आपूर्ति का केवल 1% है। शनिवार को कच्चे तेल की कीमतें मामूली गिरावट के साथ $57.32 प्रति बैरल पर आ गईं।
रूस और चीन का प्रभाव
वेनेजुएला ने रूस, चीन और ईरान के साथ गहरे सैन्य और आर्थिक संबंध बनाए हैं, जिसे अमेरिका खतरे के रूप में देखता है। रूस ने अमेरिका को सैन्य तनाव बढ़ाने के खिलाफ चेतावनी दी है, जबकि चीन का आर्थिक प्रभाव भी इस क्षेत्र में बढ़ रहा है। वेनेजुएला का भविष्य अब वहां के राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिका के अगले कदमों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने खुद को राष्ट्रपति घोषित किया है और अमेरिकी नियंत्रण का विरोध करने की कसम खाई है।
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