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पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई से गहराया मानवीय संकट

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का जुल्म: सुराब में घर-घर छापेमारी और प्रताड़ना, विस्थापन का बढ़ा डर

बलूचिस्तान के सुराब जिले में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर आम नागरिकों के साथ मारपीट और जबरन घर खाली कराने का आरोप लगा है। वहीं कलात में 30 हजार लोगों को विस्थापित होने का फरमान सुनाया गया है।

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का जुल्म सुराब में घर-घर छापेमारी और प्रताड़ना विस्थापन का बढ़ा डर

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बलूचिस्तान (पाकिस्तान)। बलूचिस्तान के सुराब जिले में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा घर-घर तलाशी अभियान के नाम पर आम नागरिकों के साथ मारपीट और प्रताड़ना का मामला सामने आया है। द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, सेना की इस सख्त कार्रवाई और जबरन बेदखली के कारण पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर विस्थापन और मानवीय संकट का खतरा मंडराने लगा है।

सुराब के रोदेनी और डाम्ब में सेना का सर्च ऑपरेशन

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना की भारी टुकड़ियों ने रोदेनी और डाम्ब इलाकों में पहुंचकर आवासीय संपत्तियों की तलाशी ली। इस दौरान सेना पर आरोप लगा कि अधिकारियों ने आम लोगों को गंभीर धमकियां दीं और उनके साथ शारीरिक मारपीट की। हालांकि, इस पूरे अभियान के दौरान किसी की आधिकारिक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

ड्रोन हमलों और जबरन बेदखली का बढ़ा डर

स्थानीय निवासियों का दावा है कि सुरक्षा अधिकारी उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन और घर छोड़कर जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। यही नहीं, नागरिकों का आरोप है कि रिहाइशी बस्तियों को बार-बार ड्रोन हमलों का निशाना भी बनाया गया है। इससे पहले भी सुराब बाजार से 20 से अधिक नागरिकों को हिरासत में लेकर पास के सैन्य शिविर में ले जाया गया था, जबकि शिविर के निकट रहने वाले परिवारों को पहले ही खदेड़ा जा चुका है।

कलात में 30 हजार लोगों को घर छोड़ने का अल्टीमेटम

बलूचिस्तान में सेना के अभियानों से पहले निवासियों को इलाका खाली करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। कलात जिले के शूर पारोद इलाके में प्रांतीय प्रशासन ने 5,000 परिवारों यानी लगभग 30,000 लोगों को 30 अक्टूबर तक अपने घर खाली कर निर्धारित शिविरों में जाने का हुक्म दिया है। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुहम्मद हमजा शफकत ने चेतावनी दी है कि आदेश न मानने वालों को बलपूर्वक हटाया जाएगा।

मानवाधिकार संगठन 'पांक' की कड़ी चेतावनी

बलूच नेशनल मूवमेंट की मानवाधिकार शाखा 'पांक' ने इस फरमान पर कड़ा एतराज जताया है। पांक ने कहा कि सशस्त्र लड़ाकों की मौजूदगी या जमीन पर सरकारी दावे का हवाला देकर आम नागरिकों को इस तरह बेघर नहीं किया जा सकता। संगठन ने ध्यान दिलाया कि पुश्तैनी जमीन किसी समुदाय की पहचान और अस्तित्व से जुड़ी होती है। कड़ाके की ठंड की शुरुआत में हजारों लोगों को कैंपों में भेजना उनके जीवन और स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक साबित होगा।
(इनपुट: ANI)

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