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अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश की निंदा

अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश की निंदा, आरोपी पर नव-नाजी विचारधारा से जुड़ने का आरोप

अमेरिका के ऑरोरा में हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश की निंदा हुई। आरोपी के दस्तावेजों में नव-नाजी विचारधारा के संकेत मिले।

 अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश की निंदा आरोपी पर नव-नाजी विचारधारा से जुड़ने का आरोप

Plot to Attack Hindu Temple in US Condemned, Suspect Linked to Neo-Nazi Ideology |

ऑरोरा (इलिनॉय, अमेरिका): अमेरिका के इलिनॉय राज्य के ऑरोरा में एक हिंदू मंदिर में भारतीय अमेरिकियों को निशाना बनाकर सामूहिक गोलीबारी करने की कथित श्वेत वर्चस्ववादी साजिश की अमेरिकी सांसदों, स्थानीय अधिकारियों और भारत सरकार ने कड़ी निंदा की है। जांचकर्ताओं के अनुसार, मामले में गिरफ्तार आरोपी से जुड़े दस्तावेजों में नव-नाजी और चरमपंथी विचारधारा के संकेत मिले हैं। इस मामले में 19 वर्षीय एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस को 11 अक्टूबर को ऑरोरा के श्री वेंकटेश्वर स्वामी बालाजी मंदिर को निशाना बनाकर संभावित सामूहिक गोलीबारी की साजिश की सूचना मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था।

हमले की योजना से जुड़े दस्तावेज बरामद

पैलेटाइन पुलिस विभाग के अनुसार, जांचकर्ताओं ने एक दस्तावेज बरामद किया है, जिसमें कथित हमले की योजना का विवरण है। इसके अलावा हथियार और सामरिक उपकरण भी मिले हैं। शिकागो ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों को आरोपी से संबंधित एक घोषणापत्र मिला है, जिसका शीर्षक "मैंने क्यों लड़ाई लड़ी: उर्फ (ऑरोरा शूटर का घोषणापत्र)" बताया गया है। इसमें कथित तौर पर श्वेत वर्चस्ववादी और चरमपंथी विचारधाराओं से जुड़े बयान शामिल हैं। पुलिस ने हथियार, राइफल के सैकड़ों कारतूस, सामरिक उपकरण, बॉडी आर्मर और श्वेत वर्चस्ववादी उग्रवाद से जुड़े प्रतीकों वाला एक बैज बरामद होने की भी जानकारी दी है। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, अभियोजकों का आरोप है कि पापोराकिस ने खुले तौर पर खुद को श्वेत वर्चस्ववादी बताया था और भारतीय लोगों को मारने की इच्छा व्यक्त की थी।

भारतीयों, यहूदियों और अश्वेत लोगों को निशाना बनाने का आरोप

रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी के घोषणापत्र में भारतीयों, यहूदियों और अश्वेत लोगों को अमानवीय बताते हुए उनमें से अधिक से अधिक लोगों की हत्या करने की कथित योजना का जिक्र किया गया था। पापोराकिस पर आतंकवादी धमकी देने का एक मामला, जो श्रेणी-1 का गंभीर अपराध है, और अवैध रूप से हथियार रखने का एक मामला दर्ज है। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, बुधवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने उसे हिरासत में रखने का आदेश दिया। उसकी अगली अदालत में पेशी 30 अक्टूबर को निर्धारित है।

सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने जताई चिंता

इस मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने खुलासा किया कि कथित हमले की साजिश के समय वह और उनका परिवार मंदिर में पूजा कर रहे थे। कृष्णमूर्ति ने सोशल मीडिया पर भारतीय अमेरिकियों को कथित रूप से निशाना बनाए जाने की निंदा की और नस्लीय घृणा तथा श्वेत वर्चस्व के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा, "रविवार को जब मैं और मेरा परिवार ऑरोरा स्थित अपने हिंदू मंदिर में पूजा कर रहे थे, तभी एक श्वेत वर्चस्ववादी ने भारतीय अमेरिकियों को निशाना बनाकर सामूहिक गोलीबारी करने की कोशिश की। मैं उन सभी का आभारी हूं जिन्होंने इस त्रासदी को रोकने में मदद की, लेकिन हमें उस नफरत का सामना करने के लिए एकजुट होना होगा जिसने इतने निर्दोष लोगों की जान खतरे में डाल दी है।"

भारतीय विरोधी नफरत को लेकर सांसद ने किया आगाह

कृष्णमूर्ति ने नफरत से प्रेरित हिंसा के खतरों को गंभीरता से लेने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "इस तरह की हिंसा का खतरा दिखाता है कि भारतीय विरोधी नफरत और श्वेत वर्चस्व कितना खतरनाक हो गया है, और हम इन खतरों को गंभीरता से लेने के लिए तब तक इंतजार नहीं कर सकते जब तक कि निर्दोष लोग मारे न जाएं।"

एशियाई प्रशांत अमेरिकी कॉकस ने भी की निंदा

कांग्रेस के एशियाई प्रशांत अमेरिकी कॉकस (सीएपीएसी) ने भी कथित साजिश की निंदा की। संगठन ने इसे अल्पसंख्यक समुदायों और पूजा स्थलों के लिए श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा से उत्पन्न खतरे का उदाहरण बताया। सीएपीएसी ने अपने नेतृत्व वक्तव्य में कहा, "यह साजिश हमारे समुदायों और पूजा स्थलों के लिए श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा से उत्पन्न वास्तविक खतरे को उजागर करती है, और इसे अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता।" कॉकस ने सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट (सीएसओएच) की 28 सितंबर को जारी एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया। रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई अमेरिकियों को निशाना बनाकर ऑनलाइन नफरत में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

सोशल मीडिया पर दक्षिण एशियाई विरोधी नफरत में वृद्धि

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच सोशल मीडिया मंच X पर दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ मासिक नफरत भरी पोस्ट में 240 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच इस मंच पर दक्षिण एशियाई विरोधी पांच लाख से अधिक पोस्ट सामने आईं। रिपोर्ट में कहा गया कि नस्लवादी और अमानवीय सामग्री में अक्सर राष्ट्रीयता, धर्म और जातीय पहचान के आधार पर दक्षिण एशियाई लोगों को निशाना बनाया जाता है। इसमें भारतीय, पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, सिख, हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लोगों को समान रूढ़िवादी धारणाओं के आधार पर निशाना बनाए जाने का भी उल्लेख है।

भारत सरकार ने बताया बेहद चिंताजनक मामला

भारत सरकार ने भी कथित साजिश पर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने घटना के हिंदू-विरोधी और नस्लवादी स्वरूप को बेहद चिंताजनक बताया तथा अमेरिकी अधिकारियों से मामले की गहन जांच करने का आग्रह किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की। ऑरोरा के मेयर जॉन लेश ने भी कथित साजिश की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने या पूजा स्थल पर जाने के लिए धमकियों और डर का सामना नहीं करना चाहिए। शहर प्रशासन की ओर से जारी बयान में लेश ने कहा कि हिंदू मंदिर के सदस्यों को निशाना बनाए जाने की खबरों से वह बेहद दुखी और परेशान हैं। उन्होंने कहा, "किसी को भी अपने धर्म का पालन करने या पूजा स्थल पर जाने के लिए कभी भी धमकी, असुरक्षा या हमले का सामना नहीं करना चाहिए। हालांकि मैं आभारी हूं कि हमला नहीं हुआ, लेकिन यह साजिश पूरी तरह से अस्वीकार्य है। मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं: हमारे समुदाय में नफरत की कोई जगह नहीं है।" मेयर ने अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को खतरे के बारे में सतर्क करने वाले व्यक्ति की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने प्रभावित मंदिर और व्यापक हिंदू समुदाय के साथ एकजुटता व्यक्त की।

इलिनॉय के गवर्नर ने भी की निंदा

इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रिट्जकर ने भी कथित साजिश की निंदा करते हुए भारतीय अमेरिकी समुदाय और सभी धर्मों के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने X पर लिखा, "इलिनॉय में नफरत की कोई जगह नहीं है। हम भारतीय अमेरिकी समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा की कड़ी निंदा करते हैं, जो इलिनॉयवासियों की बदौलत ऑरोरा में नहीं हुई। मैं यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं कि सभी धर्मों को वह सुरक्षा, सम्मान और शांति मिले जिसके वे हकदार हैं।" इस कथित साजिश के बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों और समुदाय के नेताओं ने भारतीय विरोधी नफरत, धार्मिक कट्टरता और श्वेत वर्चस्ववादी उग्रवाद का मुकाबला करने की मांग दोहराई है। साथ ही, पूजा स्थलों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया है। मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही से कथित साजिश से जुड़े तथ्यों तथा आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

(एएनआई)

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