POJK में जारी अशांति के विरोध में इस्लामाबाद के छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने हिंसा रोकने, प्रतिबंध हटाने और स्थानीय लोगों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग की।
इस्लामाबाद (पाकिस्तान)। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) में जारी अशांति के विरोध में इस्लामाबाद के छात्रों ने प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया। छात्रों ने हिंसा रोकने, प्रतिबंध हटाने और स्थानीय लोगों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग करते हुए पाकिस्तानी सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की।
पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे छात्र, शांति और संवाद की उठाई आवाज
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और बोर्ड लेकर नारे लगाए और पाकिस्तानी अधिकारियों से POJK के हालात का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से निकालने की मांग की। उन्होंने हिंसा रोकने, लगाए गए प्रतिबंध हटाने और स्थानीय लोगों से बातचीत शुरू करने की अपील की। मीडिया से बात करते हुए प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया और सरकार से तनाव कम करने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं को दूर करने और शांति कायम करने के लिए बातचीत जरूरी है।
हाशिर अब्बासी ने लगाया दमन का आरोप, कश्मीर मुद्दे पर ध्यान देने की अपील
प्रदर्शनकारियों में से एक हाशिर अब्बासी ने कहा, "पूरे पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन लगभग डेढ़ महीने से जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर कोई गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया है। निहत्थे लोगों के खिलाफ हिंसा की जा रही है, जबकि चुनाव सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं। रावलकोट की स्थिति पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। हम दमन के खिलाफ खड़े हैं और कश्मीर के लोगों का समर्थन करते हैं।"
मोहम्मद खालिद गुज्जर ने अत्याचार रोकने और न्याय की मांग की
एक अन्य प्रदर्शनकारी, मोहम्मद खालिद गुज्जर ने कहा, "जम्मू-कश्मीर के लोगों पर हो रहे अत्याचार बंद होने चाहिए और शांति कायम होनी चाहिए। हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे इन कार्रवाइयों को समाप्त करें और लोगों की जायज चिंताओं को बातचीत और न्याय के माध्यम से हल करें।"
रावलकोट समेत कई इलाकों में जारी अशांति के बीच हुआ प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन रावलकोट समेत जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में हफ्तों से जारी अशांति के बीच हो रहा है, जहां शासन, राजनीतिक अधिकार, आर्थिक चुनौतियां और सुरक्षा उपायों जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन और हताहतों की खबरें आई हैं। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया, जबकि अधिकारियों का कहना है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये उपाय आवश्यक थे।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नागरिक स्वतंत्रता की मांग हुई तेज
इस अशांति ने क्षेत्र में अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नागरिक स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए राजनीतिक समूहों और नागरिक समाज की मांगों को और तेज कर दिया है। (Source- ANI)
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