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युद्धविराम पर अनिश्चितता के बादल

ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाने पर ट्रंप का इनकार, बढ़ सकता है पश्चिम एशिया में तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को संकेत दिया कि वे ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं।

ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाने पर ट्रंप का इनकार बढ़ सकता है पश्चिम एशिया में तनाव

फाइल फोटो |

वॉशिंगटन (अमेरिका)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को संकेत दिया कि वे ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं। इससे इस बात की संभावना बढ़ गई है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध को पूरी तरह से रोकने के लिए ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हो पाता है तो पश्चिमी एशिया में फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू हो सकती है।

समझौता न होने पर जारी रहेगी नाकेबंदी

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यह फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि युद्धविराम की समय सीमा से पहले समझौता हो पाता है या नहीं। उन्होंने आगे कहा कि अगर युद्धविराम का समझौता नहीं हो पाता है तो ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। उन्होंने आगे कहा, 'हो सकता है कि मैं इसे आगे न बढ़ाऊँ लेकिन नाकेबंदी जारी रहेगी। हालाँकि हो सकता है कि मैं इसे आगे न बढ़ाऊँ तो, नाकेबंदी तो रहेगी ही और बदकिस्मती से हमें फिर से बम गिराना शुरू करना पड़ेगा।'

22 अप्रैल की डेडलाइन के बाद बढ़ेगी अनिश्चितता

ट्रंप इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि अगर बुधवार, 22 अप्रैल तक कोई डील नहीं हुई तो क्या युद्धविराम बढ़ाया जाएगा, क्योंकि मौजूदा दो हफ़्ते का सीजफायर उसी दिन खत्म होने वाला है। इन बातों से अमेरिका के कड़े रुख का पता चलता है, जिसमें ट्रंप ने साफ किया कि नाकेबंदी तो जारी रहेगी, लेकिन युद्ध में रुकावट शायद न आए।

सोमवार को शुरू हो सकता है बातचीत का नया दौर

खबर है कि डील पर पहुंचने के लिए सोमवार को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के वार्ताकारों के बीच बातचीत का एक नया दौर होने की उम्मीद है। सीएनएन ने बातचीत के बारे में यह जानकार ईरानी अधिकारियों के हवाले से यह बात कही है।

रविवार को पाकिस्तान पहुंच सकता है प्रतिनिधिमंडल

सीएनएन के अनुसार प्रतिनिधिमंडल के रविवार को पाकिस्तान की राजधानी पहुंचने की संभावना है। इस दौरे का मकसद दोनों पक्षों के बीच किसी संभावित समाधान के लिए जमीन तैयार करना है, क्योंकि इससे पहले हुई बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी।

पहले की शांति वार्ता रही थी बेनतीजा

11 अप्रैल से 12 अप्रैल तक इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता, अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से ज़्यादा समय से चल रही युद्ध को खत्म करने की एक ऐतिहासिक, लेकिन बेनतीजा कूटनीतिक कोशिश थी। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुई यह बातचीत, 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच पहली उच्च-स्तरीय, आमने-सामने की बातचीत थी।

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