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पाक बड़े आतंकी समूहों का अड्डा

अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: पाकिस्तान बना आतंकी संगठनों का सुरक्षित ठिकाना

अमेरिकी कांग्रेस की 25 मार्च की रिसर्च रिपोर्ट में पाकिस्तान को कई बड़े सशस्त्र, आतंकवादी समूहों के संचालन का अड्डा करार दिया गया है।

अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा पाकिस्तान बना आतंकी संगठनों का सुरक्षित ठिकाना

फाइल फोटो |

वाशिंगटन। अमेरिकी कांग्रेस की 25 मार्च की रिसर्च रिपोर्ट में पाकिस्तान को कई बड़े सशस्त्र, आतंकवादी समूहों के संचालन का अड्डा करार दिया गया है। रिपोर्ट में अधिकारियों को बताया गया है कि इन आतंकी समूहों में कुछ 1980 के दशक से बने हुए हैं।

दर्जनों आतंकी संगठनों को मिला पनाह

रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से बारह आतंकी समूहों को अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठनों (एफटीओ) के रूप में नामित किया गया है। इनमें से अधिकतर इस्लामी चरमपंथी विचारधारा के पोषक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय ये संगठन हवाई हमलों सहित कई बड़े सैन्य अभियान और लाखों खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान में भी हराये नहीं जा सके हैं।

लश्कर-ए-तैयबा और 26/11 जैसे हमलों का जिक्र

रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकी समूह या तो वैश्विक स्तर पर केंद्रित हैं, अफगानिस्तान से संबंधित हैं, भारत से संबंधित हैं, घरेलू हैं या सांप्रदायिक प्रकृति के हैं। आतंकी समूह लश्कर-ए-तैबा (एलईटी) का गठन 1980 के दशक की शुरुआत में पाकिस्तान में हुआ था। साल 2001 में इसे विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित किया गया था। हाफिज सईद के नेतृत्व में और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान प्रशासित (आजाद) कश्मीर में स्थित इस संगठन ने प्रतिबंधों से बचने के लिए अपना नाम बदलकर जमात-उद-दावा कर लिया है। कई हजार लड़ाकों वाले इस संगठन ने 2008 में भारत के मुंबई शहर पर हुए भीषण आतंकी हमले के साथ-साथ कई अन्य हाई-प्रोफाइल हमलों को अंजाम दिया था।

जैश समेत कई संगठनों की सक्रियता उजागर

उधर, जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) की स्थापना 2000 में आतंकी ऑपरेटिव मसूद अजहर द्वारा की गई थी। इसे 2001 में एक विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) के रूप में नामित किया गया था। जेईएम के लगभग 500 सशस्त्र आतंकी भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में सक्रिय हैं। हरकत-उल जिहाद इस्लामी, हरकत उल-मुजाहिदीन और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे अन्य समूह भी पाकिस्तान से संचालित होते हैं। लश्कर की ही एक शाखा, जो खुद को द रेजिस्टेंस फ्रंट कहती है, पहलगाम हमलों के उसका हाथ था। टीआरएफ को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है।

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