राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर लगातार 8वें दिन किए हमले। जॉर्डन में सैनिकों की मौत का लिया बदला। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
फ्लोरिडा (अमेरिका)। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने व्हाइट हाउस के सीधे आदेश पर ईरान समर्थित ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रखा है। लगातार 8वीं रात अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के रणनीतिक और तटीय ठिकानों को निशाना बनाते हुए भीषण बमबारी की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हरी झंडी के बाद शुरू हुआ यह हमला जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत का सीधा बदला माना जा रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र को एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
व्हाइट हाउस का सीधा एक्शन: 'दबाव और विनाश' की रणनीति
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इस भीषण सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। बयान के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कमांडर-इन-चीफ (राष्ट्रपति) के सीधे निर्देश पर 18 जुलाई को रात 11:30 बजे (ET) ईरान के खिलाफ हवाई हमलों का एक और बड़ा चरण पूरा कर लिया है। इस सैन्य अभियान का प्राथमिक उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से पंगु (Degrade) बनाना है। अमेरिकी खुफिया इनपुट के आधार पर उन ठिकानों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है, जहां से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सेना पर हमले की साजिश रची जा रही थी।
इन रणनीतिक ठिकानों पर बरसीं अमेरिकी मिसाइलें
अमेरिकी वायुसेना और नौसैनिक बेड़े ने ईरान के कई बेहद संवेदनशील और रणनीतिक मोर्चों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। CENTCOM के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित ठिकानों को तबाह किया गया:
तटीय निगरानी नेटवर्क (Coastal Surveillance Networks): इसके जरिए ईरान होर्मुज जलडमरू मध्य में जहाजों की आवाजाही पर नजर रखता था।
वायु रक्षा बुनियादी ढांचा (Air Defence Infrastructure): अमेरिकी विमानों को रोकने की ईरानी क्षमता को ध्वस्त किया गया।
समुद्री संपत्तियां (Maritime Assets): ईरानी नौसेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नौसैनिक ठिकाने।
मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट्स: जहां बड़े पैमाने पर हमले के लिए हथियार जमा किए गए थे।
सैनिकों की मौत का 'त्वरित प्रतिशोध': IRGC को सीधे चेतावनी
यह ताजा और आक्रामक सैन्य कार्रवाई सीधे तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के खिलाफ केंद्रित थी। CENTCOM ने बेहद कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि यह हमला सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि एक 'दंडात्मक कार्रवाई' (Punitive Action) है। कमांड ने अपने बयान में कहा, "अमेरिकी सेना ने विशेष रूप से उन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ताकतों को निशाना बनाया, जिन्होंने शुक्रवार देर रात जॉर्डन में अमेरिकी सेवा सदस्यों पर घातक हमले किए थे। इसका मकसद अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने वालों को तुरंत सजा देना है।"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अधिकृत यह अभियान न केवल जॉर्डन हमले का बदला है, बल्कि इसका एक और बड़ा भू-राजनीतिक उद्देश्य भी है। CENTCOM के अनुसार, यह कार्रवाई "होर्मुज जलडमरू मध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों को डराने और धमकाने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह समाप्त करने के लिए तैयार की गई है।"
युद्ध के मुहाने पर मिडिल ईस्ट: 50,000 अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर
इस बड़े सैन्य टकराव के बीच अमेरिका ने पूरे पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य उपस्थिति को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने क्षेत्र में तैनात अपने सैनिकों की संख्या और उनके मनोबल को लेकर दुनिया को कड़ा संदेश दिया है। कमांड ने बताया कि मिडिल ईस्ट में इस समय 50,000 से अधिक अमेरिकी महिला और पुरुष सैनिक (सशस्त्र बल) तैनात हैं। वे पूरी तरह से सतर्क, केंद्रित, घातक और किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार हैं।"

नुकसान का आंकड़ा: 28 फरवरी से अब तक 16 अमेरिकी सैनिकों की मौत
यह तनाव तब और गंभीर हो गया जब अमेरिका ने पुष्टि की कि शुक्रवार (17 जुलाई) को ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों से देश की रक्षा करते हुए दो अमेरिकी सैनिकों ने अपनी जान गंवा दी। इसके अलावा, एक अमेरिकी सैनिक अभी भी लापता (Missing in Action) है, जिसकी तलाश जारी है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से शुरू की गई सैन्य कार्रवाइयों के बाद से इस पूरे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। नवीनतम हताहतों के साथ, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक ड्यूटी पर मारे गए अमेरिकी सैन्य कर्मियों की आधिकारिक संख्या बढ़कर 16 हो गई है।
घायल सैनिकों की स्थिति पर अपडेट देते हुए अमेरिकी सैन्य मुख्यालय ने कहा, "हमले में घायल हुए चार अमेरिकी सेवा सदस्यों को इलाज के लिए जॉर्डन के अस्पतालों में ले जाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद अब उन्हें छुट्टी दे दी गई है। वहीं, मामूली चोटों वाले अन्य सैनिक प्राथमिक जांच के बाद अपनी ड्यूटी पर लौट आए हैं।"
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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