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चंद्रा के ₹22,006 करोड़ रीपेमेंट प्लान पर विवाद

सुभाष चंद्रा के ₹22,006 करोड़ रीपेमेंट प्लान पर विवाद, NCLT के फैसले को चुनौती देंगे बैंक

सुभाष चंद्रा के ₹22,006 करोड़ के रीपेमेंट प्लान को NCLT से मंजूरी मिलने के बाद विवाद बढ़ गया है। केनरा बैंक, UBI और LIC हाउसिंग फाइनेंस NCLAT जाएंगे।

सुभाष चंद्रा के ₹22006 करोड़ रीपेमेंट प्लान पर विवाद nclt के फैसले को चुनौती देंगे बैंक

Banks to Challenge NCLT Order on Subhash Chandra's ₹22,006 Cr Plan |

नई दिल्ली (भारत)। नई दिल्ली में एस्सेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के प्रस्तावित रीपेमेंट प्लान को लेकर कानूनी विवाद बढ़ गया है। केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) लिमिटेड और LIC हाउसिंग फाइनेंस ने NCLT (National Company Law Tribunal) के उस आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें चंद्रा के करीब ₹22,006 करोड़ के दावों के निपटारे वाले प्लान को मंजूरी दी गई थी। बैंकों का कहना है कि उन्होंने प्लान का विरोध किया था और अब वे NCLAT (National Company Law Appellate Tribunal) का रुख करेंगे।

केनरा बैंक ने प्लान के खिलाफ वोट दिया, फोरेंसिक ऑडिट की मांग भी की

केनरा बैंक, जिसके पास 1.60 प्रतिशत वोटिंग शेयर था, ने कहा कि उसने रीपेमेंट प्लान के खिलाफ वोट दिया था और वह नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के सामने अपील दायर करेगा। केनरा बैंक ने सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि उसने फोरेंसिक ऑडिट की भी मांग की थी, लेकिन माइनॉरिटी वोटिंग शेयर के कारण इस अनुरोध को मंजूरी नहीं मिल सकी।

UBI और LIC हाउसिंग फाइनेंस भी NCLT आदेश के खिलाफ करेंगे अपील

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) ने भी कहा कि उसने प्लान को अस्वीकार कर दिया था और NCLAT के सामने NCLT (National Company Law Tribunal) के आदेश को तुरंत चुनौती देगा। LIC हाउसिंग फाइनेंस ने कहा कि वह अन्य पब्लिक फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के साथ मिलकर अपील दायर करेगा। लेंडर्स ने कहा कि प्लान को इसलिए मंजूरी दी गई क्योंकि 80.81 प्रतिशत वोटिंग शेयर रखने वाले अन्य फाइनेंशियल क्रेडिटर्स ने इसका समर्थन किया था।

NCLT ने ₹22,006 करोड़ के दावों के बदले ₹6.25 करोड़ के भुगतान वाले प्लान को दी मंजूरी

NCLT ने 25 अगस्त को चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को मंज़ूरी दी थी, जिसके तहत लगभग ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकार किए गए दावों के बदले क्रेडिटर्स को ₹6.25 करोड़ और इनसॉल्वेंसी-प्रोसेस की लागत के लिए ₹25 लाख का भुगतान किया जाना है। यह कार्यवाही एस्सेल ग्रुप से जुड़ी कंपनियों द्वारा लिए गए लोन के लिए चंद्रा द्वारा दी गई पर्सनल गारंटी से संबंधित है। कई लेंडर्स की आपत्तियों के बावजूद प्लान को मंजूरी दी गई, क्योंकि ट्रिब्यूनल ने माना कि जरूरी बहुमत ने इसका समर्थन किया था।

₹22,000 करोड़ के दावों पर सुभाष चंद्रा ने दी सफाई, कहा- यह व्यक्तिगत लोन नहीं

गुरुवार को जारी एक सार्वजनिक बयान में चंद्रा ने ₹22,000 करोड़ की राशि को उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए लोन के तौर पर दिखाए जाने को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह राशि कॉर्पोरेट लोन के लिए उनके द्वारा दी गई गारंटी से उत्पन्न दावों को दर्शाती है। चंद्र ने तर्क दिया कि रीपेमेंट प्लान का विरोध करने वाले लेंडर्स के दावे 22,000 करोड़ रुपये के बजाय लगभग 3,992 करोड़ रुपये के हैं, और कहा कि ग्रुप बकाया देनदारियों को निपटाने के लिए प्रतिबद्ध है। (Source: ANI)

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