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हिंदी बोलने वालों को रिझाने की ममता की कोशिश

बंगाल में हिंदी भाषियों के लिए दो दिन की छुट्टी

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हिंदीभाषियों में अपनी लोकप्रियता को बढ़ाने में पिछड़ना नहीं चाहतीं। खासकर कोलकाता,समेत पूरे राज्य में हिंदी भाषियों को रिझाने की कोशिश कर रही हैं।

बंगाल में हिंदी भाषियों के लिए दो दिन की छुट्टी

बंगाल में हिंदी भाषियों के लिए दो दिन की छुट्टी

हिंदी बोलने वालों को रिझाने की ममता की कोशिश

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हिंदीभाषियों में अपनी लोकप्रियता को बढ़ाते जाने में तनिक भी पिछड़ना नहीं चाहती। हिंदीभाषियों, खासकर कोलकाता,आसपास के उपनगरों या राज्य के दूसरे हिस्सों में बिहार के रहने वाले हिंदीभाषियों का छठ बड़ा त्योहार है। छठ के मौके पर हिंदीभाषियों के लिए दो दिन की छुट्टी की घोषणा कर चुकी हैं। पहले एक दिन की छुट्टी होती रही है। इस साल से दो दिन की छुट्टी होती रहेगी। उन्होंने छठ प्रतियों की सुविधा-सहूलियतों के लिए प्रशासन और पुलिस के तमाम अधिकारियों को सभी जरूरी इंतजाम का आदेश दिया है। हुगली नदी के उन घाटों पर पर्याप्त व्यवस्था, महानगर के विभिन्न जगहों से घाट तक जाने के मार्ग को खाली रखने आदि पर जोर दिया है ।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी छठ शुरू होने के पहले छठ घाटों का मुआयना करेंगी। उनके निर्देश के अनुसार पार्टी की ओर से छठ पूजा की शुरुआत के वक्त छठव्रतियों को फलफूल, नारियल, सूप आदि सामग्री प्रदान की जाएंगी। पार्टी को ओर से यह कार्यक्रम उन सभी जगहों में किया जाएगा, जहां हिंदीभाषी हैं। 
पिछले दिनों मुख्यमंत्री बनर्जी ने इस बात पर चिंता जताई थी कि उनके विधानसभा चुनाव क्षेत्र में "बाहरी" लोग जमीन और मकान खरीद कर "बाहरी" लोगों को ठहराया जा रहा है जिससे टीएमसी की जीत प्रभावित हो। उनके इस बयान पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। ममता बनर्जी ने बाद में स्पष्ट किया कि जो लोग पहले से इलाके में रह रहे हैं वे अपने हैं । उन्होंने विरोधी पार्टियों पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी की जनवरी के मध्य में होने वाले गंगा सागर मेला पर भी नजर है। गंगा सागर मेला में देश भर से तीर्थयात्री आते हैं। उनमें बिहार और उत्तर प्रदेश के तीर्थयात्रियों की तादाद सबसे ज्यादा होती है। 
दक्षिण चौबीस परगना जिले के प्रशासन ने गंगा सागर मेले की व्यवस्था करने बाबत बैठक की है। इस बार ऐसी व्यवस्था हो जिसकी व्यापक चर्चा हो और हिंदीभाषियों पर उसका अच्छा असर हो।
विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों द्वारा महानगर में हुगली नदी के घाटों पर तीर्थयात्रियों को ठहराने और गंगा सागर मेला स्थल तक ले जाने ले आने की व्यवस्था की जाती है। राजनीतिक पार्टियों के नेता-कार्यकर्ता उनके मददगार होते है। टीएमसी इस मामले में सबसे आगे रहे।

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