Bhopal : मदनी ने शुक्रवार को कहा कि बाबरी मस्जिद और तलाक के मामलों पर आए फैसलों से ऐसा लगता है कि अदालत, सरकार के दबाव में काम कर रही है.
Bhopal : मदनी ने शुक्रवार को कहा कि बाबरी मस्जिद और तलाक के मामलों पर आए फैसलों से ऐसा लगता है कि अदालत, सरकार के दबाव में काम कर रही है. जिहाद और कोर्ट के फैसलों को लेकर जमीयत उलेमा ए हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी का बयान आया है.
मदनी ने कहा कि आज जिहाद जैसे पवित्र शब्द को मीडिया और सरकार गलत तरीके से दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं. जिहाद को लव जिहाद, थूक जिहाद, जमीन जिहाद जैसे शब्दों के साथ जोड़कर पेश किया जाता है. जिहाद हमेशा पवित्र था और रहेगा, जिस-जिस जगह पर भी कुरान में या दूसरी किताबों में जिहाद का जिक्र आया, वह हमेशा दूसरों की भलाई और बेहतरी के लिए आया, जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा. मैं फिर से इस बात को दोहराता हूं कि जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा.
'30 फीसदी ऐसे हैं, जो मुसलमानों के खिलाफ हैं'
मदनी ने कहा, इस समय देश में 10% लोग ऐसे हैं, जो मुसलमानों के फेवर में हैं. 30 फीसदी ऐसे हैं, जो मुसलमानों के खिलाफ हैं और 60% लोग ऐसे हैं, जो खामोश हैं. मुसलमान को चाहिए कि जो 60% खामोश लोग हैं, उनसे बात करें. अपनी बातों को उनके सामने रखें. अपनी चीजों को उन्हें समझाएं. अगर यह 60% लोग मुसलमान के खिलाफ हुए तो फिर देश में बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा.
मदनी ने कहा, मैं ये साफ कर देना चाहता हूं कि भारत जैसे सेक्युलर देश में जहां जम्हूरी हुकूमत है, वहां जिहाद मौजूए बहस ही नहीं है. यहां मुसलमान संविधान की वफादारी के पाबंद हैं. यहां सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संविधान के मुताबिक नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें और अगर वह ऐसा नहीं करती तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार है. याद रखा जाए कि सुप्रीम कोर्ट उस वक्त तक ही सुप्रीम कहलाने का हकदार है, जब तक वहां संविधान की हिफाजत होगी. अगर ऐसा नहीं होगा तो अखलाक़ी तौर पर भी वो सुप्रीम कहलाने का हकदार नहीं है.
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