दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम की याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें NEET परीक्षा के लिए केंद्र सरकार के अस्थायी रूप से ब्लॉक करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम की याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें NEET परीक्षा के लिए केंद्र सरकार के अस्थायी रूप से ब्लॉक करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार का तुरंत एक्शन लेना जरूरी था। जस्टिस तेजस करिया ने बताया कि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 69A के तहत सभी प्रक्रियाओं का सही पालन किया गया।
टेलीग्राम के तर्क को कोर्ट ने खारिज किया
टेलीग्राम का तर्क था कि आदेश में कुछ खामियां थीं, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। जस्टिस करिया ने कहा कि सरकार के पास ठोस कारण थे और आदेश में कोई कमी नहीं थी। इससे साफ है कि अधिकारियों ने इस मामले पर गंभीरता से विचार किया। आदेशों में सोच-विचार की कमी नहीं है।
सरकार का अस्थायी रोक लगाना सीमित उपाय- कोर्ट
टेलीग्राम ने कोर्ट में जो तर्क दिया था कि ब्लॉक करने का आदेश ज़रूरत से ज़्यादा सख्त था, कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार का अस्थायी रोक लगाना एक सीमित उपाय है, जिसका मकसद NEET की परीक्षा के दौरान गलत इस्तेमाल को रोकना था। उन्होंने कहा कि सरकार के उपाय कम से कम पाबंदी वाले हैं, और ये नहीं कहा जा सकता कि आदेश ज़्यादा सख्त है।
देलीग्राम की दलील कोर्ट ने ठुकरायी
टेलीग्राम की दलील भी कोर्ट ने ठुकरा दी कि धारा 69A के तहत पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि 'जानकारी' शब्द के दायरे में किसी प्लेटफॉर्म को बाहर नहीं रखा जा सकता।
बैन का आदेश कानून के मुताबिक जारी
केंद्र सरकार ने टेलीग्राम के बैन होने का बचाव करते हुए कहा कि NEET परीक्षा से पहले टेलीग्राम का इस्तेमाल नकल करने वाले नेटवर्क परीक्षा के पेपर लीक करने के लिए कर रहे थे। इसलिए, अस्थायी बैन जरूरी था, ताकि लाखों छात्रों की परीक्षा की निष्पक्षता बनी रहे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि यह आदेश कानून के अनुसार जारी किया गया था और इसमें भरोसेमंद जानकारी का आधार था। उन्होंने इसे एक एहतियाती कदम बताया, जो परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता की रक्षा के लिए जरूरी था। इसके अलावा, रिव्यू कमेटी ने भी इस बैन को सही ठहराने के लिए पर्याप्त आधार पाए।
टेलीग्राम के वकील ने जताया विरोध, कोर्ट ने जताई असहमति
टेलीग्राम के सीनियर वकील ध्रुव मेहता ने हाल ही में सरकार के ब्लॉकिंग ऑर्डर पर कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि ये आदेश लाखों लोगों के कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म को पूरी तरह से बंद कर देता है। क्या कुछ यूज़र्स की गलतियों के आधार पर पूरे प्लेटफॉर्म का एक्सेस बंद करना सही है? टेलीग्राम ने कहा है कि वो अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहा है और कानून का उल्लंघन करने वाले चैनल्स के खिलाफ कार्रवाई भी कर रहा है। लेकिन, कोर्ट ने इस पर सहमति नहीं जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि सेक्शन 69A की ज़रूरतें पूरी हो गई हैं और असाधारण हालात में ये अस्थायी कदम सही है। ये ब्लॉकिंग ऑर्डर फिलहाल 22 जून तक लागू रहेगा।