भोपाल: एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी ने मृत आईपीएस अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से लाइसेंस रिन्यू कराया और 5 साल में सरकारी विभागों से 8 करोड़ से अधिक की राशि हासिल की।
भोपाल। राजधानी से भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी ने मृत आईपीएस (IPS) अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग करके अपना लाइसेंस रिन्यू कराया और पिछले 5 वर्षों में सरकारी विभागों से ₹8 करोड़ से अधिक का भुगतान हासिल कर लिया।
जीएसटी के नाम पर भी वसूले
आईपीएस अधिकारी की मृत्यु साल 2015 में हो गई थी, उनके ही फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग 2017 में लाइसेंस रिन्यूअल के लिए किया गया। फर्जी लाइसेंस के आधार पर एजेंसी ने संस्कृति विभाग से जुड़े 14 कार्यालयों में सुरक्षा का ठेका हासिल किया और 5 साल में ₹8 करोड़ से ज्यादा का पेमेंट लिया। एजेंसी ने ₹90.60 लाख जीएसटी के नाम पर भी वसूले, जबकि लाइसेंस ही अवैध था।
गृह विभाग ने लाइसेंस जारी करने से किया इनकार
गृह विभाग ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई लाइसेंस जारी ही नहीं किया। विभाग के अनुसार, संबंधित एजेंसी का लाइसेंस केवल मई 2017 तक वैध था, उसके बाद कोई रिन्यूअल नहीं हुआ।
यह है मामला
क्लासिक सिक्योरिटी सर्विसेज एंड कंसल्टेंट की शुरुआत 2012 हुई थी। गृह विभाग से सुरक्षा (पसारा) लाइसेंस मिला था, जिसकी वैधता 2017 तक थी। 2017 में वैधता खत्म होने के बाद, संचालक आर.के. पांडे ने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए मृत IPS एस.के. पांडे (जिनकी मृत्यु 25 दिसंबर 2015 को हार्ट अटैक से हुई थी) के फर्जी साइन का इस्तेमाल किया। इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद, भारत भवन और पंजाबी साहित्य अकादमी जैसे 14 सरकारी दफ्तरों में गार्ड तैनात किए गए।
फर्जी हस्ताक्षर से इनकार
जांच में पता चला कि 2017-22 के बीच के लाइसेंस पर आईपीएस एस.के. पांडे के हस्ताक्षर थे, जबकि वे उस समय जीवित ही नहीं थे। मामला सामने आने के बाद 2022 में विभागों से गार्ड तो हटा दिया गया, लेकिन एजेंसी का भुगतान नहीं रोका गया। उधर, एजेंसी के संचालक आर.के. पांडे ने कहा कि उन्होंने कोई फर्जी दस्तावेज नहीं लगाया और यह उन्हें फंसाने की साजिश है।
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