भारत ने कहा है कि वह उन भारतीय नागरिकों की रिहाई का मुद्दा मॉस्को के साथ विभिन्न स्तरों पर लगातार उठा रहा है, जो अभी भी रूसी सशस्त्र बलों के साथ हैं।
नई दिल्ली: भारत ने कहा है कि वह उन भारतीय नागरिकों की रिहाई का मुद्दा मॉस्को के साथ विभिन्न स्तरों पर लगातार उठा रहा है, जो अभी भी रूसी सशस्त्र बलों के साथ हैं। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यह टिप्पणी अमेरिका के अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच हुई हालिया बैठक के संदर्भ में की गई। विदेश मंत्रालय की द्विपक्षीय प्रेस ब्रीफिंग के दौरान सवालों के जवाब देते हुए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जयशंकर ने जी20 सम्मेलन से इतर कई द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें उनके रूसी समकक्ष के साथ हुई बैठक भी शामिल थी। यह पूछे जाने पर कि क्या बैठक के दौरान रूसी सशस्त्र बलों के साथ अभी भी सेवा दे रहे भारतीय नागरिकों का मुद्दा उठाया गया, जायसवाल ने कहा कि भारत विभिन्न स्तरों पर रूस के साथ इस मामले को लगातार आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, "जहां तक उन भारतीय नागरिकों की रिहाई का सवाल है, जो अभी भी रूसी पक्ष के साथ हैं, जैसा कि मैंने आपको पहले भी बताया है, यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे हम रूसी पक्ष के साथ विभिन्न स्तरों पर लगातार उठा रहे हैं।"
यूरोप और पश्चिम एशिया के संघर्षों पर भी हुई चर्चा
जायसवाल के अनुसार, बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने यूरोप और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री ने जी20 बैठक से इतर कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें रूस के विदेश मंत्री के साथ हुई बैठक भी शामिल थी। इस दौरान यूरोप के साथ-साथ मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों पर बातचीत हुई। पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने कहा था कि लगभग 259 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती किया गया था। इनमें से 139 को सरकारी प्रयासों के माध्यम से डिस्चार्ज कर वापस भारत लाया गया था, जबकि अन्य 69 की वापसी के लिए मॉस्को के साथ बातचीत जारी थी। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके पास उन रंगरूटों की संख्या की कोई जानकारी नहीं है, जिन्होंने रूसी नागरिकता प्राप्त कर ली होगी, क्योंकि उसके रिकॉर्ड में केवल भारतीय नागरिकों का विवरण होता है।
जयशंकर ने लावरोव के साथ यूक्रेन और खाड़ी की स्थिति पर की चर्चा
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर द्विपक्षीय बातचीत के दौरान यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी की स्थिति और व्यापक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अटलांटा में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। जयशंकर ने शनिवार, 31 अक्टूबर को एक्स पर लावरोव के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए बैठक की पुष्टि की थी। उन्होंने लिखा कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। यह बातचीत जारी रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में हुई, जो दुनिया के नेताओं को विभाजित करना जारी रखे हुए है। वहीं, पश्चिम एशिया में तनाव ने ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
भारत ने संवाद और कूटनीति को बताया समाधान का रास्ता
चर्चाओं में यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों को शामिल किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मौजूद व्यापक भू-राजनीतिक चिंताओं को दर्शाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को और पश्चिमी देशों के बीच मतभेदों के बावजूद, नई दिल्ली ने उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठकों के माध्यम से रूस के साथ अपना जुड़ाव जारी रखा है। भारत लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति आवश्यक हैं। जी20 सम्मेलन में जयशंकर ने सैन्य कार्रवाई की तुलना में कूटनीतिक जुड़ाव के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अकेले सैन्य समाधान जटिल वैश्विक चुनौतियों को हल नहीं कर सकते और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
रूसी विदेश मंत्री की मौजूदगी पर जी20 में भी दिखे मतभेद
जयशंकर और लावरोव के बीच यह बैठक यूक्रेन युद्ध और अन्य अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को लेकर जी20 सदस्यों के बीच मतभेदों के बीच हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित अटलांटा की दो दिवसीय बैठक में रूस की भागीदारी को लेकर भी असहमति देखने को मिली। लावरोव के साथ पारंपरिक समूह तस्वीर साझा करने पर कई यूरोपीय प्रतिनिधियों ने कथित तौर पर आपत्ति जताई, जिसके बाद मेजबान देश ने इस व्यवस्था को रद्द कर दिया। कई विवादास्पद मुद्दों पर आम सहमति नहीं बन पाने के कारण बैठक बिना किसी संयुक्त विज्ञप्ति के समाप्त हुई। इसके बाद अमेरिका ने चर्चाओं की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अध्यक्ष का बयान जारी करने का फैसला किया।
ऊर्जा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी हुई चर्चा
यूक्रेन संघर्ष के अलावा, वार्ताओं में ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, खाद्य सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य तथा लाल सागर सहित प्रमुख समुद्री मार्गों की सुरक्षा के मुद्दे भी शामिल रहे।
ANI
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