भारत तेल और गैस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए नेशनल हाइड्रोकार्बन टेक्नोलॉजी हब स्थापित करेगा। मंत्रालय 100 तक PhD स्कॉलर्स को आर्थिक सहायता भी देगा।
नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तेल एवं गैस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) को मजबूत करने के लिए नेशनल हाइड्रोकार्बन टेक्नोलॉजी हब स्थापित कर रहा है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव आलोक त्रिपाठी ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। इस पहल का उद्देश्य शोध के नतीजों को व्यावसायिक उपयोग वाली तकनीकों में बदलने की प्रक्रिया तेज करना और देश में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना है।
एनर्जी टेक्नोलॉजी मीट 2026 में सामने आई पहल
गोवा में आयोजित 29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी मीट (ETM) 2026 के दौरान आलोक त्रिपाठी ने बताया कि प्रस्तावित टेक्नोलॉजी हब राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान एवं विकास का इकोसिस्टम तैयार करने में मदद करेगा। इससे तेल और गैस क्षेत्र में विकसित तकनीकों की क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। इस कार्यक्रम में 2,500 से अधिक प्रतिभागियों और लगभग 250 वक्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनी में तेल एवं गैस उद्योग के अपस्ट्रीम, मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों की तकनीकों के साथ कंप्रेस्ड बायोगैस जैसी ग्रीन मॉलिक्यूल्स तकनीकों को भी प्रदर्शित किया गया।
शोध से व्यावसायीकरण तक पहुंचाने पर जोर
इस वर्ष एनर्जी टेक्नोलॉजी मीट की थीम 'फ्रॉम रिसर्च टू कमर्शियलाइजेशन' यानी अनुसंधान से व्यावसायीकरण तक रखी गई थी। इसका उद्देश्य शोध के परिणामों को व्यावसायिक रूप से उपयोगी तकनीकों में बदलने की आवश्यकता पर जोर देना था। त्रिपाठी के अनुसार, इस पहल से तेल और गैस क्षेत्र की व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, शोध और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
IIT और RGIPT के साथ मंत्रालय का सहयोग
आलोक त्रिपाठी ने बताया कि मंत्रालय ने अनुसंधान कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) और राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (RGIPT) जैसे शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग के तहत तेल और गैस क्षेत्र में काम करने वाले 100 तक PhD स्कॉलर्स को आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं को अनुसंधान एवं विकास के लिए अधिक समय उपलब्ध कराना है।
अगले पांच वर्षों में मजबूत होगा शैक्षणिक अनुसंधान इकोसिस्टम
मंत्रालय की इस पहल से अगले पांच वर्षों में तेल और गैस क्षेत्र में एक मजबूत शैक्षणिक अनुसंधान इकोसिस्टम तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। आलोक त्रिपाठी ने बताया कि इस सहयोग का विशेष ध्यान उद्योग से जुड़ी चुनौतियों पर रहेगा। इससे शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले शोध को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने और तकनीकी समाधानों को व्यावहारिक रूप देने में मदद मिल सकती है।
वैश्विक कंपनियों के साथ दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी पर जोर
त्रिपाठी ने कहा कि एनर्जी टेक्नोलॉजी मीट ने वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को भारत के नीतिगत सुधारों और तेल-गैस क्षेत्र में निवेश के अवसरों को समझने के लिए मंच उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल विदेशी कंपनियों से तकनीक खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि घरेलू तकनीकी विकास के लिए वैश्विक विशेषज्ञों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ दीर्घकालिक साझेदारी करना चाहता है।
उन्होंने कहा, "हम अब ऐसा पारंपरिक संबंध नहीं चाहते जहाँ विदेशी कंपनियां तकनीक बेचें और हम उसे खरीदें। हम केवल 'खरीदार-विक्रेता' वाला रिश्ता नहीं रखना चाहते।" उन्होंने जोर दिया कि भारत में तकनीक विकसित करने से लागत कम करने में मदद मिल सकती है, जिसका लाभ अंततः उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है।
रिफाइनिंग में ऊर्जा दक्षता और स्थिरता पर ध्यान
रिफाइनिंग क्षेत्र की कार्यक्षमता में सुधार पर बात करते हुए त्रिपाठी ने कहा कि अब परिचालन प्रदर्शन के साथ-साथ स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) पर भी अधिक ध्यान दिया जा रहा है। भारतीय तेल कंपनियां वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के सहयोग से ऊर्जा-कुशल तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रही हैं, जिनमें ऊर्जा की खपत कम होती है। इसके साथ ही कंपनियां ऐसी तकनीकों को देश के भीतर विकसित करने के प्रयास भी कर रही हैं, ताकि घरेलू तकनीकी क्षमता बढ़े और लागत में कमी लाई जा सके। (Source: ANI)
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