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NCERT का बड़ा कदम

NCERT ने कक्षा 9 की नई किताब में न्यायपालिका की 'आजादी और निष्पक्षता' पर दिया जोर

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने स्कूली पाठ्यक्रम में एक बड़ा और नीतिगत बदलाव किया है।

ncert ने कक्षा 9 की नई किताब में न्यायपालिका की आजादी और निष्पक्षता पर दिया जोर

NCERT Revamps Class 9 Civics Book After Judiciary Row |

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने स्कूली पाठ्यक्रम में एक बड़ा और नीतिगत बदलाव किया है। कुछ महीने पहले कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायिक भ्रष्टाचार से जुड़े एक अध्याय पर भारी विवाद हुआ था, जिसके बाद उस किताब को वापस ले लिया गया था। अब राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत कक्षा 9 के लिए राजनीति विज्ञान की एक नई किताब पेश की गई है। इस नई पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका को नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाली और संविधान की गरिमा को बनाए रखने वाली एक "निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था" के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

कक्षा 8 की किताब से शुरू हुआ पूरा विवाद

यह पूरा घटनाक्रम साल के शुरुआती महीनों में हुए एक बड़े विवाद से जुड़ा हुआ है। उस समय NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों पर एक खंड शामिल किया गया था। इस खंड में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मुकदमों के बोझ और जनता के गिरते विश्वास जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और तत्काल रोक

इस मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत ने खुद कड़ा रुख अपनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस सामग्री का स्वत: संज्ञान (suo motu cognisance) लेते हुए अध्याय के कुछ हिस्सों को बेहद आपत्तिजनक माना था। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए इस पाठ्यपुस्तक के प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर तुरंत रोक लगाने का निर्देश दिया था।

NCERT ने वापस ली किताब, मांगी बिना शर्त माफी

न्यायालय के इस सीधे हस्तक्षेप के बाद NCERT को बैकफुट पर आना पड़ा था। परिषद ने कक्षा 8 की इस किताब की भौतिक (फिजिकल) और डिजिटल दोनों प्रतियों को बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से वापस ले लिया था। इसके साथ ही NCERT ने इस मामले में अदालत से बिना शर्त माफी भी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट कहा था कि इस अध्याय में न्यायपालिका से जुड़ी अपमानजनक सामग्री शामिल थी।

नई किताब में शक्ति के पृथक्करण पर विशेष जोर

विवादों के बाद तैयार की गई कक्षा 9 की इस नई पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका की भूमिका को पूरी तरह से संवैधानिक और सुरक्षात्मक ढांचे में ढाला गया है। पुस्तक में शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत (doctrine of separation of powers) को विस्तार से समझाया गया है। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका से पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करती है।

न्यायपालिका की संवैधानिक शक्तियों को विस्तार से समझाया

किताब में न्यायपालिका की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए लिखा गया है, "न्यायपालिका एक निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था है जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है और संविधान की भावना को अक्षुण्ण रखती है।" इतना ही नहीं, इस नए अध्याय में अदालतों को मिलने वाली संवैधानिक शक्तियों का भी पुरजोर जिक्र किया गया है। किताब के अनुसार, "न्यायपालिका कार्यपालिका के कार्यों और संवैधानिक संशोधनों की समीक्षा करती है, संविधान का उल्लंघन करने वाले कानूनों को अमान्य (रद्द) कर सकती है और संविधान की रक्षा करती है।"

जनहित याचिका (PIL) और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर

NCERT ने नए पाठ्यक्रम में न्यायपालिका को समाज के हर तबके के मददगार के रूप में पेश किया है। पुस्तक में आगे लिखा गया है, "लोकतांत्रिक मूल्यों और समाज के सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने में न्यायपालिका एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से न्यायपालिका समय-समय पर जनहित याचिकाओं (PILs) पर सुनवाई करती है।" इस नए अध्याय में अदालतों को एक ऐसी प्रमुख संवैधानिक संस्था के रूप में वर्णित किया गया है, जिसकी प्राथमिक जिम्मेदारी मौलिक अधिकारों की रक्षा करना और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाकर रखना है।

NCERT ने बताई नए पाठ्यक्रम बदलाव की वजह

इस पूरे बदलाव और नए दृष्टिकोण पर NCERT ने अपनी आधिकारिक स्थिति भी साफ की है। परिषद का तर्क है कि कक्षा 9 की यह नई पाठ्यपुस्तक NCF के तहत नए सिरे से डिजाइन किए गए पाठ्यक्रम का ही एक हिस्सा है। NCERT के मुताबिक, अब संवैधानिक विषयों को किसी एक ही किताब में समेटने के बजाय अलग-अलग कक्षाओं के स्तर के अनुसार विभाजित किया गया है। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि न्याय, स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद जैसी मूलभूत अवधारणाओं को विभिन्न कक्षाओं में क्रमिक (progressive) रूप से शामिल किया जा रहा है और ये सभी विषय आगे भी पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा बने रहेंगे।
(यह खबर ANI से सीधे संपादित की गई है।)

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