लाल किला कार बम धमाका मामले में NIA कोर्ट ने 7500 पन्नों की चार्जशीट का संज्ञान लिया। 11 आरोपियों पर देशविरोधी साजिश का आरोप, 9 सितंबर को अगली सुनवाई।
NSG team investigate the spot of the blast in a car near Gate no 1 of the Red Fort Metro station (File Photo) |
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित विशेष NIA अदालत ने शनिवार को दिल्ली के लाल किले में हुए विस्फोट के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दायर चार्जशीट का संज्ञान लिया। NIA ने 12 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की थी। धमाके में आरोपी उमर उन नबी की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य आरोपी फरार है। दो आरोपियों के खिलाफ एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की गई थी।
नवंबर 2025 के कार बम धमाके का मामला
यह मामला नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार बम धमाके से जुड़ा है। NIA पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। उनमें से एक की मौत नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए घातक धमाके में हो गई थी। विशेष NIA न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सभी आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट का संज्ञान लिया। सुनवाई की अगली तारीख 9 सितंबर है। अदालत ने NIA से चार्जशीट की कॉपी उपलब्ध कराने को कहा है।
7500 पन्नों की चार्जशीट और 588 गवाह
NIA ने 11 आरोपियों के खिलाफ 7500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। एजेंसी ने 588 गवाहों का हवाला दिया है। NIA की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) माधव खुराना, तृषा मित्तल और पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अनिल डबास पेश हुए। बताया गया कि 11 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट 14 मई को दाखिल की गई थी। इसके बाद, 27 जून, 2026 को एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए आरोपी
NIA ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपियों को अदलात के सामने पेश किया। पेश किए गए आरोपियों में आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ़्ती इरफ़ान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार का नाम शामिल है।
10 नवंबर 2025 को ब्लास्ट में 11 लोगों की हुई थी मौत
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके के सिलसिले में 11 आरोपियों के खिलाफ 7500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। NIA के मुताबिक, तेज धमाके वाले VBIED (गाड़ी में रखे गए इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) ब्लास्ट में 11 लोगों की मौत हुई थी, कई अन्य घायल हुए थे और आस-पास की संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा था। एजेंसी ने गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के अधिनियम के प्रावधान लागू किए हैं।
मुख्य साजिशकर्ता की मौत, अन्य आरोपियों के नाम
जिन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उनमें मुख्य साजिशकर्ता माने जाने वाले डॉ. उमर उन नबी भी शामिल हैं। उनकी मौत के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही बंद करने का प्रस्ताव है। अभियोजन पक्ष की शिकायत में नामजद अन्य आरोपियों में आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुज़म्मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ़्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं।
आतंकी संगठन AGuH और 'अल-कायदा' कनेक्शन
NIA का आरोप है कि सभी आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े थे, जो 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) का ही एक हिस्सा है। गृह मंत्रालय ने 2018 में इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया था। एजेंसी के मुताबिक, यह चार्जशीट जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-NCR में की गई व्यापक जांच पर आधारित है। बताया जाता है कि अभियोजन पक्ष की शिकायत में 588 मौखिक बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और जब्त किए गए 200 से अधिक भौतिक सबूत शामिल हैं।
'ऑपरेशन हेवनली हिंद' और सरकार गिराने की साजिश
NIA ने एक बड़े जिहादी साजिश का आरोप लगाया है। इसमें चिकित्सा पेशेवरों सहित कट्टरपंथी लोग शामिल हैं। ये कथित तौर पर AQIS/AGuH की विचारधारा से प्रेरित हैं। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि आरोपियों ने 2022 में श्रीनगर में एक गुप्त बैठक के दौरान संगठन को "AGuH अंतरिम" के रूप में पुनर्गठित किया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने "ऑपरेशन हेवनली हिंद" (Operation Heavenly Hind) नाम से एक अभियान शुरू किया था। इस अभियान का मकसद लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को गिराना और शरिया शासन लागू करना था।
TATP विस्फोटक और हथियार जुटाने का खुलासा
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर सदस्य भर्ती किए, चरमपंथी विचारधारा फैलाई, हथियार और गोला-बारूद जमा किए और आसानी से मिलने वाले रसायनों का इस्तेमाल करके विस्फोटक बनाए। NIA का दावा है कि धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक पदार्थ 'ट्रायसिटोन ट्राइपरॉक्साइड' (TATP) था, जिसे कई प्रयोगों के बाद तैयार किया गया था।
DNA और फोरेंसिक जांच से हुई पुष्टि
जांच में कथित तौर पर AK-47 राइफल, क्रिनकोव राइफल और देसी पिस्तौल सहित प्रतिबंधित हथियारों की अवैध खरीद का भी खुलासा हुआ। साथ ही सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले रॉकेट और ड्रोन से लैस IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) के प्रयोग भी सामने आए। एजेंसी ने बताया कि DNA फिंगरप्रिंटिंग और आवाज विश्लेषण सहित वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच से मृतक आरोपी डॉ. उमर उन नबी की पहचान स्थापित करने में मदद मिली।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: साइबर आतंकवाद मामले में NIA की बड़ी कार्रवाई, तेलंगाना में पांच जगह छापेमारी