टाटा संस में एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नुयुक्ति पर घमासान जारी है। नोएल टाटा ने इसे अवैध करार दिया है, वहीं राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
नई दिल्ली। टाटा समूह के भीतर कॉर्पोरेट विवाद और ज्यादा गहराता जा रहा है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने एन. चंद्रशेखरन की कार्यकारी चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्ति को अवैध करार दिया है, जिस पर अब राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है।
टाटा संस बोर्ड मीटिंग और नोएल टाटा के कड़े सवाल
टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी सुप्रकाश मुखोपाध्याय को 26 अक्टूबर को लिखे पत्र में नोएल टाटा ने दावा किया कि 17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग में चंद्रशेखरन की पुनर्नुयुक्ति का प्रस्ताव बिना किसी पूर्व निर्धारित स्पष्ट एजेंडे के लाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्हें मीटिंग की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और फाइनल मिनट्स उपलब्ध नहीं कराए गए।
नोएल टाटा ने पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा, "यह प्रस्ताव अमान्य है।" उन्होंने तर्क दिया कि यह नियुक्ति टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के प्रावधानों के विरुद्ध है। उनके अनुसार, इसके लिए जरूरी चयन समिति (Selection Committee) नहीं बनाई गई थी और आर्टिकल 104B के तहत डायरेक्टर्स की आवश्यक सहमति भी नहीं ली गई थी।
राहुल गांधी का हमला, 'भारतीय व्यवसाय खिलौना नहीं'
इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट शेयर कर केंद्र सरकार और उद्योग जगत पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि टाटा समूह को "आपराधिक तरीके से बर्बाद" किया जा रहा है और देश के कारोबारी नेता डर के मारे कुछ बोल नहीं पा रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा, “टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है, और किसी भी कारोबारी नेता में एक शब्द बोलने की हिम्मत नहीं है। आप कब तक चुप रहेंगे? क्या तब तक, जब तक वे आपको पूरी तरह अपने कब्जे में न ले लें? भारतीय व्यवसाय मोदी और शाह का खिलौना नहीं है। आपमें हिम्मत की कमी है, लेकिन हममें नहीं है। हम इन अपराधों के लिए न्याय सुनिश्चित करेंगे।”
नोएल टाटा का अल्टीमेटम और दस्तावेजों की मांग
नोएल टाटा ने कंपनी को सात दिनों का अल्टीमेटम देते हुए मीटिंग की रिकॉर्डिंग, संशोधित मिनट्स, वोटिंग डिटेल्स और मंत्रालय को सौंपे गए दस्तावेजों की मांग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि टाटा संस रजिस्ट्रार को लिखित रूप में यह बताए कि इस प्रस्ताव की वैधता पर गंभीर विवाद है और स्थिति स्पष्ट होने तक इस पर कोई आगे का कदम न उठाया जाए।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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