कांग्रेस नेता टी.एस. सिंह देव ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्ताक्षर से पहले संसद को इसकी शर्तें बताने की मांग की।
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नई दिल्ली (भारत)। कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने बुधवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किए। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापार वार्ता में हुई प्रगति की जानकारी भारतीय सरकार के बजाय भारत आए अमेरिकी अधिकारियों की ओर से दी जा रही है। सिंह देव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले संसद को इसकी शर्तों की जानकारी दी जाए। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की।
अमेरिकी अधिकारी के बयान का किया जिक्र
टी.एस. सिंह देव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए व्यापार वार्ता में कथित प्रगति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत आए एक अमेरिकी अधिकारी की टिप्पणियों का उल्लेख किया। सिंह देव ने कहा कि व्यापार समझौते से जुड़ी जानकारी अमेरिकी पक्ष की ओर से सामने आ रही है। उन्होंने इसे भारत के आर्थिक और रणनीतिक फैसलों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के संदर्भ में उठाया।
कच्चे तेल और रक्षा उपकरणों की खरीद पर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने भारत की कच्चे तेल की खरीद और रक्षा उपकरणों की खरीद से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अमेरिकी अधिकारी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि भारत किस तरह का कच्चा तेल खरीद रहा है, उसे कहां से प्राप्त कर रहा है और किन अमेरिकी रक्षा प्रणालियों की खरीद की जा सकती है, जैसी जानकारियां भी साझा की गईं। सिंह देव ने तंज कसते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों को इन विषयों पर जानकारी संसद या अपनी सरकार के बजाय अमेरिकी अधिकारियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से मिल रही है।
उन्होंने कहा, “भारत के लिए अच्छी खबर है। हमारा व्यापार समझौता लगभग पूरा हो चुका है। हमें कैसे पता चला? संसद से नहीं। अपनी खुद की सरकार से भी नहीं। हमें यह बात मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) से पता चली। उनके पास इस बात की भी जानकारी थी कि हम किस तरह के कच्चे तेल को रिफाइन करने के लिए तैयार हैं, हम अपना तेल कहां से खरीद रहे हैं, इस पर वाशिंगटन कितना खुश है, और हमें आगे कौन से अमेरिकी रक्षा सिस्टम खरीदने चाहिए। बहुत ही विस्तृत जानकारी दी गई। हमारी सरकार को भी इससे कुछ सीख लेनी चाहिए।”
किसानों और छोटे निर्माताओं पर समझौते के असर का मुद्दा उठाया
टी.एस. सिंह देव ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का असर किसानों, छोटे निर्माताओं और आम परिवारों पर पड़ सकता है। उन्होंने व्यापार समझौते की शर्तों को सार्वजनिक करने की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, ऐसे समझौते किसानों को उनकी फसलों का मिलने वाला मूल्य, छोटे निर्माताओं का मुनाफा और परिवारों के लिए ईंधन की कीमत जैसे मुद्दों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के लोगों को ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी किसी विदेशी अधिकारी की यात्रा के दौरान होने वाली प्रेस ब्रीफिंग से क्यों मिलनी चाहिए।
बजट का उदाहरण देकर सरकार से मांगी पारदर्शिता
कांग्रेस नेता ने केंद्रीय बजट का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार संसद और जनता के साथ पर्याप्त जानकारी साझा नहीं कर रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो अगला बजट भी अमेरिका में किसी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान घोषित किया जा सकता है और भारत के वित्त मंत्री को विशेष अतिथि के रूप में बुलाया जा सकता है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने सरकार की सूचना साझा करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
पीएम मोदी से संसद में समझौते की शर्तें बताने की मांग
टी.एस. सिंह देव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्ट करने की मांग की कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत क्या दे रहा है और बदले में उसे क्या मिल रहा है। उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले संसद को इसकी शर्तों की जानकारी दी जानी चाहिए। सिंह देव ने इस बात पर जोर दिया कि समझौते से जुड़े फैसलों और उनके संभावित प्रभावों के बारे में देश के प्रतिनिधियों को जानकारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर यही हाल रहा, तो हो सकता है कि अगला बजट भी अमेरिका में किसी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान घोषित किया जाए, जिसमें हमारे वित्त मंत्री को एक विशेष अतिथि के रूप में बुलाया जाए। एक व्यापार समझौता यह तय करता है कि किसानों को उनकी फसलों का क्या दाम मिलेगा, छोटे निर्माताओं का मुनाफा कितना होगा, और हर परिवार के लिए ईंधन की कीमत क्या होगी। ये ऐसी बातें नहीं हैं जिन्हें किसी देश को किसी विदेशी मंत्री की यात्रा डायरी से पता चलना चाहिए। क्या प्रधानमंत्री समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले संसद को बताएंगे कि भारत क्या दे रहा है और उसे क्या मिल रहा है?” (Source: ANI)
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