बिहार के बाद अब पूरे देश में मतदाता सूची के विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान (एसआइआर) की तैयारी है। लेकिन उत्तर प्रदेश में अभी एसआइआर की प्रक्रिया शुरू नहीं होगी।
यूपी में अभी नहीं चलेगा गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान
पंचायत चुनाव को देखते हुए लिया गया फैसला
लखनऊ।
बिहार के बाद अब पूरे देश में मतदाता सूची के विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान (एसआइआर) की तैयारी है। लेकिन उत्तर प्रदेश में अभी "एसआइआर" की प्रक्रिया शुरू नहीं होगी। निर्वाचन आयोग द्वारा ये फैसला यूपी में जल्द होने वाले पंचायत चुनाव को देखते हुए लिया गया है।
देशभर के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) की दिल्ली में दो दिन तक चली बैठक के बाद निर्वाचन आयोग ने पूरे देश में एसआईआर कराने का आदेश दे दिया है। लेकिन पहले चरण में उन राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर नहीं होगा जहां अगले चार महीने मौसम अनुकूल नहीं रहेंगे या फिर उन राज्यों में नगरीय निकाय या पंचायत आदि के चुनाव प्रस्तावित है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई दो दिवसीय बैठक में चुनाव आयुक्त एसएस संधु और विवेक जोशी सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने भाग लिया था।
चुनाव आयोग में शीर्ष स्तर पर यह आम राय है कि एसआईआर की प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में अंजाम दिया जाए, जिसकी शुरुआत उन राज्यों से हो जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। वैसे पहले चरण में और भी राज्यों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इस दौरान उन राज्यों में वोटर लिस्ट सफाई का यह अभियान नहीं चलाया जाएगा, जहां स्थानीय निकाय चुनाव होते रहेंगे या होने वाले होंगे। क्योंकि, जमीनी मशीनरी उन चुनावों में लगी होगी, जिससे उन्हें एसआईआर के काम पर फोकस रखने में मुश्किल आएगी।
बैठक में बनी सहमति के मुताबिक यूपी में विधानसभा और लोकसभा चुनाव की मतदाता सूचियों का गहन विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान फिलहाल नहीं चलेगा।उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, पंचायत चुनाव के मद्देनजर इस पर चुनाव आयोग में सहमति बन गई है। इस संबंध में हाल ही में दिल्ली में चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के साथ बैठक की।
सूत्रों के मुताबिक, तय हुआ है कि पहले उन पांच राज्यों में एसआईआर होगा, जहां वर्ष 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ये राज्य हैं-असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिमी बंगाल। इसके साथ कुछ अन्य राज्य भी आयोग शामिल कर सकता है। कुछ मुख्य चुनाव अधिकारियों ने सुझाव दिए कि जिन राज्यों में स्थानीय निकाय के चुनाव चल रहे हैं या होने वाले हैं, वहां इस चरण में एसआईआर नहीं कराया जाए। इसकी वजह दोनों ही तरह की मतदाता सूचियों के लिए बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) का कॉमन होना बताया गया।