प्रोटीन अब सिर्फ जिम, शेकर बोतल और बॉडीबिल्डिंग तक सीमित नहीं रह गया है। तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच भारतीयों के लिए प्रोटीन रोजमर्रा के खान-पान का एक सुविधाजनक हिस्सा बनता जा रहा है।
नई दिल्ली: प्रोटीन अब सिर्फ जिम, शेकर बोतल और बॉडीबिल्डिंग तक सीमित नहीं रह गया है। तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच भारतीयों के लिए प्रोटीन रोजमर्रा के खान-पान का एक सुविधाजनक हिस्सा बनता जा रहा है। खासकर कामकाजी पेशेवरों, लंबे समय तक यात्रा करने वाले लोगों और घर-परिवार की जिम्मेदारियां संभालने वाले लोगों के लिए यह दैनिक पोषण को बेहतर तरीके से बनाए रखने का एक विकल्प बन रहा है।
व्यस्त दिनचर्या में बढ़ी प्रोटीन की जरूरत
आज कई लोगों के पास नियमित रूप से संतुलित भोजन की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता। सुबह की मीटिंग से पहले जल्दी नाश्ता करने वाले पेशेवर हों या लंबे समय तक काम और यात्रा करने वाले लोग, उनके लिए रोजाना पर्याप्त पोषण लेना एक चुनौती बन सकता है। ऐसे में प्रोटीन को लेकर सोच भी बदल रही है। अब इसे सिर्फ मांसपेशियां बनाने या फिटनेस से जोड़कर नहीं देखा जा रहा, बल्कि संतुलित पोषण और सुविधाजनक खान-पान के हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है।
फिटनेस से आगे बढ़ा प्रोटीन का बाजार
बदलती मांग के साथ भारतीय बाजार में भी प्रोटीन आधारित उत्पादों की विविधता बढ़ रही है। हॉर्लिक्स प्रोटीन, न्यूट्राबॉक्स, ओपन सीक्रेट, नेचुरलटीन और अन्य ब्रांड इस श्रेणी को पारंपरिक बॉडीबिल्डिंग दर्शकों से आगे ले जाने में योगदान दे रहे हैं। आम उपभोक्ताओं के लिए इसका आकर्षण किसी फिटनेस ट्रेंड का हिस्सा बनने से ज्यादा रोजमर्रा के पोषण को आसान बनाना है। इसी वजह से 'रोजाना प्रोटीन' की अवधारणा तेजी से प्रासंगिक हो रही है।
नाश्ते से लेकर रोजमर्रा के भोजन तक
प्रोटीन युक्त विकल्प अपनाने के लिए जीवनशैली में बड़ा बदलाव करना जरूरी नहीं है। इसे व्यक्ति की आहार संबंधी जरूरतों और पसंद के अनुसार नाश्ते, दोपहर के भोजन या किसी अन्य नियमित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। साथ ही, उपभोक्ता अब उत्पादों को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। वे केवल आकर्षक पैकेजिंग या फिटनेस इन्फ्लुएंसरों की बातों पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि प्रोटीन की मात्रा, सामग्री, फाइबर, स्वाद और सुविधा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दे रहे हैं।
उपभोक्ताओं की बदलती पसंद
प्रोटीन और व्यापक पोषण के क्षेत्र में स्पार्कफ्यूजन और नौरिज़ा जैसे ब्रांड भी उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को दर्शाते हैं। इससे एक ऐसा बाजार तैयार हो रहा है, जहां प्रोटीन की चर्चा सिर्फ फिटनेस के संदर्भ में नहीं, बल्कि सुविधा, सामग्री की जानकारी और संतुलित पोषण के साथ हो रही है।
'रोजाना प्रोटीन' पर बढ़ता जोर
भारत में प्रोटीन का भविष्य अब सिर्फ उन लोगों तक सीमित नहीं दिखता जो नियमित रूप से जिम जाते हैं। यह उन लोगों के लिए भी प्रासंगिक होता जा रहा है जो सुबह ऑफिस पहुंचने की जल्दी में रहते हैं, लंबे समय तक काम करते हैं या परिवार और नौकरी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। कई परिवारों के लिए पोषण संबंधी फैसले अब रोजमर्रा की व्यावहारिक जरूरतों से प्रभावित होते हैं। किसी उत्पाद का उपयोग व्यस्त सुबह, लंबे ऑफिस घंटों या अन्य जिम्मेदारियों के बीच आसानी से हो सके, यह भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसी वजह से हॉर्लिक्स प्रोटीन 'एवरीडे प्रोटीन' की अवधारणा पर जोर देता है, जिसमें पोषण को किसी खास अवसर या केवल वर्कआउट के बाद की जरूरत के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर देखा जाता है।
जिम से निकलकर रोजमर्रा की जिंदगी में पहुंचा प्रोटीन
बदलती जीवनशैली और पोषण को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच प्रोटीन धीरे-धीरे जिम की दिनचर्या से निकलकर आम लोगों के दैनिक खान-पान का हिस्सा बनता जा रहा है। आने वाले समय में इस श्रेणी का विस्तार फिटनेस प्रेमियों के साथ-साथ उन लाखों भारतीयों तक भी हो सकता है, जो व्यस्त दिनचर्या के बीच बेहतर और सुविधाजनक पोषण विकल्प तलाश रहे हैं।
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