नई दिल्ली। आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ धूमावती जयंती मनाई जा रही है। यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां धूमावती दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या हैं। उनका स्वरूप अन्य देवियों से अलग माना जाता है और वे वैराग्य, तप, धैर्य तथा जीवन के कठिन अनुभवों से प्राप्त होने वाली बुद्धि की प्रतीक मानी जाती हैं।
अपनी क्षमता के अनुसार व्रत एवं दान का संकल्प
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर मां धूमावती की पूजा-अर्चना करते हैं और देवी के मंत्रों का जाप करते हैं। लोग अपनी क्षमता के अनुसार व्रत एवं दान-पुण्य का संकल्प लेते हैं। विशेष रूप से तंत्र साधना से जुड़े साधकों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सामान्य गृहस्थ श्रद्धालु भी परिवार की सुख-शांति, बाधाओं से मुक्ति और मानसिक चेतना की कामना के साथ मां की आराधना करते हैं।
अत्यंत भयंकर है देवी का यह स्वरूप
मां धूमावती का स्वरूप बहुत ही भयंकर दिखाई देता है। देवी अपने इस स्वरूप में विधवा हैं। उनके बाल बिखरे हुए हैं, रंग काला एवं शरीर एकदम सुखा हुआ है।
उन्होंने कोई श्रृंगार नहीं किया है। कुंवारी लड़कियों एवं सुहागनों के लिए इनकी पूजा प्रतिबंधित है। देनी अपने हाथों में एक खाली सुप लेकर बिना घोड़े वाला रथ पर बैठीं हैं।
तंत्र में है देवी का अहम स्थान
तंत्र शास्त्र में देवी धूमावती की एक विशेष स्थान है। देवी दस महाविद्याओं में सातवें स्थान पर हैं। इनकी पूजा ज्यादातर तांत्रिक विधि से ही किया जाता है। इन्हें वैराग्य, तप तथा गहन आध्यात्मिक ज्ञान की देवी के रूप में पूजा जाता है।
आत्मबल और आध्यात्मिक ज्ञान की ओर ले जाती हैं देवी
देवी अपने भक्तों को जीवन में आने वाले संघर्ष, अभाव और कठिनाइयां से दूर कर उनमें आत्मबल और आध्यात्मिक ज्ञान की उर्जा का संचार करती हैं। इसलिए उनकी उपासना केवल भौतिक सुख-संपत्ति के लिए नहीं, बल्कि धैर्य, विवेक और आत्मिक उन्नति के लिए भी की जाती है।मां धूमावती की आराधना से संकटों से मुक्ति और आध्यात्मिक शक्ति का वरदान प्राप्त होता है।
देश के कई शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में आज विशेष पूजा
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि धूमावती जयंती के अवसर पर संयमित जीवन, सकारात्मक सोच, जरूरतमंदों की सहायता और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का विशेष महत्व है। देश के कई शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में आज विशेष पूजा, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां धूमावती का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
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