दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इन आगों को काबू में लाना इंसानों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।
आग से उठते धुएं और राख के कणों का विश्लेषण
दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इन आगों को काबू में लाना इंसानों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। इसी मुश्किल से निपटने के लिए मिनेसोटा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक खास एआई आधारित ड्रोन तैयार किया है। यह ड्रोन आग से उठते धुएं और राख के कणों का विश्लेषण कर यह पता लगाता है कि आग किस दिशा में बढ़ सकती है और उसे कैसे रोका जा सकता है। यह ड्रोन हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों का डेटा इकट्ठा करता है और तुरंत जमीन पर मौजूद कंप्यूटर सिस्टम को भेज देता है। कंप्यूटर उस डेटा का विश्लेषण करके आग के फैलने की दिशा और धुएं की गति का अनुमान लगाता है। परियोजना से जुड़े प्रोफेसर कृष्णकुमार का कहना है कि, “हम यह समझना चाहते हैं कि धुएं के कण कितनी ऊंचाई तक और कितनी दूरी तक जाते हैं। यही जानकारी भविष्य में आग के फैलाव को रोकने में मदद करेगी।”
कई असफलताओं के बाद मिली सफलता
यह परियोजना आसान नहीं थी। शुरूआती चरणों में कई ड्रोन दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे, लेकिन वैज्ञानिकों ने बेहतर सेंसर, बड़े प्रोपेलर और शक्तिशाली मोटर लगाकर नए ड्रोन विकसित किए। अब ये ड्रोन लगभग 150 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरते हैं और करीब 25 मिनट तक लगातार डेटा एकत्र कर सकते हैं। शोधकर्ता युए वेंग बताते हैं कि “धुएं और राख के कणों का व्यवहार बहुत जटिल होता है। लेकिन अगर हम इसे समझ लें, तो हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि आग आगे कहां तक फैल सकती है।”
भविष्य के लिए एक स्वचालित कदम
परियोजना का नेतृत्व कर रहे प्रोफेसर जियारोंग हांग के अनुसार, आने वाले समय में ऐसे ड्रोन बड़े पैमाने पर जंगलों की निगरानी करेंगे। एक केंद्रीय ड्रोन बाकी चार ड्रोन को नियंत्रित करेगा और हवा की दिशा बदलते ही सभी अपने रास्ते खुद तय करेंगे। यह तकनीक सिर्फ आपात स्थिति में ही नहीं, बल्कि ‘नियंत्रित आग’ (Controlled Fire) जैसी प्रक्रियाओं में भी सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकती है।
भविष्य की नई उम्मीद
अभी यह तकनीक परीक्षण के दौर में है, लेकिन इसके परिणाम बेहद उत्साहजनक हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे इन ड्रोन की उड़ान का समय और डेटा विश्लेषण क्षमता बढ़ेगी, इन्हें वास्तविक जंगल की आग से निपटने में सीधे इस्तेमाल किया जा सकेगा। मिनेसोटा विश्वविद्यालय की टीम पहली बार वास्तविक वातावरण में धुएं के कणों की संरचना मापने में सफल हुई है। अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर अपनाई गई, तो यह वन विभागों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है — जब एआई-संचालित ड्रोन जंगलों की रक्षा में मानवता के सच्चे साथी बन जाएंगे।
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